बीम गिरने से 15 लोगों की मौत हुई थी, जल्द ही कुछ और होंगे गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
क्राइम ब्रांच के अनुसार अभी इस मामले की विवेचना जारी है। इसलिए अभी और गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। अब तक की कार्रवाई के दौरान 45 से ज्यादा लोगों का बयान दर्जन किया गया है। इसके साथ ही कुछ अन्य को गिरफ्तार भी किया जाएगा।
इसके बाद जाकर अदालत में आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। इससे पहले क्राइम ब्रांच ने सेतु निगम के अधिकारियों से दो सौ से ज्यादा पन्ने का दस्तावेेज कब्जे में लिया था और अधिकारियों व कर्मचारियों के शहर से बाहर जाने पर पाबंदी लगा रखी थी।
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कैंट रेलवे स्टेशन-लहरतारा मार्ग पर 15 मई की शाम पांच बजे के लगभग रेलवे की एईएन कॉलोनी के सामने निर्माणाधीन फ्लाईओवर के पिलर नंबर 79 और 80 के बीच बीम जी 4 और जी 5 अचानक सड़क पर गिर गई थीं। जी 5 बीम के नीचे दब कर वाहन सवार 15 लोगों की मौत हो गई और 11 लोग घायल हुए थे।
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हादसे के संबंध में 16 मई को सिगरा थाने में कैंट रोडवेज चौकी प्रभारी घनानंद त्रिपाठी की तहरीर पर चौकाघाट फ्लाईओवर से संबंधित सेतु निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
घटना की तफ्तीश सिगरा थाने से क्राइम ब्रांच को सौंप गई। इसके साथ ही पुलिस ने सीबीआरआई से जांच कर हादसे की वजह और खामियों की तकनीकी रिपोर्ट देने को कहा।
चौकाघाट फ्लाईओवर का इस्टीमेट बदलेगा। काम को मार्च 2018 तक खत्म करने के लिए इसमें कुछ बदलाव किया गया है। कुछ कंक्रीट तो कुछ लोहे के बीम लगाए जाएंगे। साथ ही इसकी लागत भी बढ़ गई है। पूर्व में प्रोजेक्ट 76 करोड़ का था। जो अब बढ़कर 130 करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है। साथ ही इसमें बीम ढलाई और रखने का काम तेज किया गया है ताकि समय से काम खत्म कराया जा सके।
सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक संदीप गुप्ता ने बताया कि पूर्व में जो डिजाइन बनी थी उस हिसाब से काम कराया जाता तो यह योजना 2019 दिसंबर तक पूरी होती। इस काम को जल्द समाप्त करने के लिए इसमें मेटल के इस्तेमाल को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है।
इससे कुछ लोहे की बीम इन पर रखी जाएंगी। इससे कंक्रीट की ढलाई का काम कम हो जाएगा। कंक्रीट से बनने वाले बीम की स्क्रैप लागत जीरो होती है जबकि लोहे से बनने वाली बीम की स्क्रैप मूल्य ज्यादा होता है। लोहे की बीम लगने से इसकी मजबूती और बढ़ जाएगी।
जिस रफ्तार से काम चल रहा है। उस हिसाब से मार्च तक काम खत्म हो जाएगा। अप्रैल से इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इसके चालू होने से कैंट पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिल जाएगी।