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उम्मीदों की मशाल: बच्चों में बापू के संस्कार डाल रही है युवाओं की टोली, बदल रही मलिन बस्ती के बच्चों की जिंदगी

Mon, 25 Apr 2022 11:05 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

बनारस के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों की यह टोली बच्चे-बच्चियों को शिक्षित करने के साथ ही ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी भी बना रही है। निचले तबके के बच्चों में शिक्षा का बांट रहे हैं।
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युवाओं ने मलिन बस्ती के बच्चों के लिए पहल की - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सर्व विद्या की राजधानी काशी में एक ऐसा स्कूल है जो बच्चों में बापू के संस्कार भर रहा है। राष्ट्रपिता की प्रेरणा से युवाओं ने मलिन बस्ती के बच्चों के लिए पहल शुरू की थी जो अब शहर से लेकर गांव तक मुहिम का रूप ले चुकी है। युवाओं की यह टोली बच्चे-बच्चियों को शिक्षित करने के साथ ही ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी भी बना रही है। निचले तबके के बच्चों में शिक्षा का बांट रहे हैं।

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मलिन बस्तियों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का बीड़ा उठाया है शहर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों और पुरा छात्रों ने। ये युवा मलिन बस्तियों में जाकर ऐसे बच्चों को तलाशते हैं, उन्हें नियमित रूप से पढ़ाते हैं। इनका नाम स्कूलों में दर्ज कराते हैं। यजत बताते हैं कि अब तक कूड़ा बीनने वाले करीब ढाई हजार बच्चों को शिक्षा अभियान से जोड़ चुके हैं।

कई बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। टीम के सदस्य प्रशांत बताते हैं कि ऐसा नहीं कि एक बार नाम लिखाने के बाद से हमने इन्हें छोड़ दिया है, बल्कि औचक निरीक्षण कर पता लगाते हैं कि बच्चे रोजाना स्कूल जा रहे हैं या नहीं। टीम के सदस्य वैभव गायन और नेहा वर्मा अभिनय की बारीकियां सीखाते है

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भारत माता मंदिर परिसर में सजती है पाठशाला

शिक्षा एक्सप्रेस में पढ़ाई - फोटो : अमर उजाला
यजत और प्रशांत ने बताया कि हमारे प्रयासों को देख पूर्व नगर आयुक्त गौरांग राठी ने बस भी प्रदान की है, जिसे शिक्षा एक्सप्रेस नाम दिया गया है। हमारे प्रयासों की सराहना प्रधानमंत्री मोदी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी व प्रतिभा देवी सिंह पाटिल भी कर चुकी हैं। युवाओं की टोली में वैभव, अंकित श्रीवास्तव, अवनीश, रंजीत रंजन, पूजा, अल्का, नीरज, तरुण जैसे कई युवा शामिल हैं।

बच्चे बोले
मुझे रोज यहां शाम को आकर पढ़ना अच्छा लगता है। भाईया और दीदी कविता और कहानी भी सुनाते हैं। अब मैं अपने से अंग्रेजी में नाम लिख लेती हूं।- वैष्णवी
यहां पढ़ाई के साथ ड्राइंग, डांस भी सिखाया जाता है, यहां आकर पढ़ना अच्छा लगता है। यहां जो पढ़ाया जाता है वो घर पर जाकर सबको सुनाता हूं।- हिमांशु
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