पद्मभूषण शारदा सिन्हा के निधन की सूचना ने काशी संगीत घराने को मर्माहत कर दिया है। सभी नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। काशी से स्वर कोकिला का बड़ा जुड़ाव रहा है। पद्मश्री डाॅक्टर सोमा घोष ने कहा कि इनका जाना लोकसंगीत जगत की बड़ी हानि है।
बिहार की कोकिला पद्मभूषण शारदा सिन्हा के निधन की सूचना से काशी का संगीत घराना शोक में है। पद्मश्री सोमा घोष ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि इनका जाना लोकसंगीत जगत की हानि है। शारदा सिन्हा के बोल ने फोक विधा को ऐसी तस्वीर दी कि हर कोई बस उसमें खोकर रह गया। हिंदी फिल्मों से लेकर छठ गीत तक हर ओर बस इनके गायन विधा के चर्चे रहे हैं।
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बताते चलें कि शारदा सिन्हा भले ही बिहार की कोकिला कही जाती हों, लेकिन काशी की मिट्टी उन्हें अपनी ओर खींचती थी। जब भी उन्हें काशी के कार्यक्रम का बुलावा आता था वो खुद को रोक नहीं पाती थीं। साल 2018 के अक्तूबर माह की पांच तारीख को बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में लोककला और संस्कृति के संवर्द्धन को लेकर तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन शारदा सिन्हा पहुंचीं और उनको सुनने श्रोताओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी।
शारदा सिन्हा ने बीएचयू के पंडित ओंकार नाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में अपनी गायिकी से सबको सराबोर कर दिया था। उन्होंने काशी को प्रणाम भी किया था। छठ पर्व पर इनके गीत करिहा क्षमा छठी मइया - आज सबकी जुबां पर है और इस पर्व के बीच में स्वर साम्राज्ञी के निधन की सूचना ने सबको स्तब्ध कर दिया है। नम आंखों से उन्हें याद किया जा रहा है।