पातालपुरी पीठाधीश्वर महंत बालक दास महाराज ने कहा कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास को शुल्क में बढ़ोतरी नहीं करनी चाहिए थी। बाहरी लोगों के लिए शुल्क बढ़ाया गया है। इसमें कोई परेशानी नहीं है लेकिन स्थानीय लोगों को भी सुगम दर्शन के लिए अतिरिक्त दाम देना होगा। ये सही नहीं। पैसे देने के बाद भी किसी को गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिल रहा है। केवल वीआईपी को ही गर्भगृह में प्रवेश दिया जा रहा है। सभी के लिए व्यवस्था समान होनी चाहिए।
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स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती
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अखिल भारतीय संत समाज के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि विशेष पर्वों पर श्रद्धालुओं का दबाव ज्यादा होता है। मंदिर न्यास ने जो शुल्क बढ़ाया है वह आम जनता के ऊपर कोई नया शुल्क नहीं है। यह पहले से लिया जाता था और स्वीकार्य था। सावन में भीड़ बढ़ेगी, कर्मचारी भी बढ़ेंगे और व्यवस्थाएं भी बढ़ानी होंगी। ऐसे में शुल्क बढ़ोतरी के विरोध का कोई सैद्धांतिक आधार नहीं है। यह विरोध तर्कसंगत नहीं है। आपकी मर्जी है और आप सुविधा लेना चाहते हैं तो शुल्क दीजिए। किसी के साथ कोई जबरदस्ती नहीं है।
काशी विश्वनाथ धाम में उमड़ी भीड़।
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काशी विश्वनाथ धाम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि सावन में सुगम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को 500 रुपये, मंगला आरती के लिए एक हजार, मध्याह्न भोग आरती के लिए 500 रुपये, सप्तर्षि आरती के लिए 500, भोग आरती के लिए 500 रुपये देने होंगे।
वहीं शास्त्री से रुद्राभिषेक कराने के लिए 700, पांच शास्त्री से रुद्राभिषेक के लिए 2100 रुपये, संन्यासी भोग के लिए 4500 रुपये शुल्क निर्धारित किए गए हैं। सावन के सोमवार पर सुगम दर्शन के लिए 750 रुपये, मंगला आरती के लिए 2000 रुपये, पांच शास्त्री से रुद्राभिषेक के लिए 3000 रुपये, संन्यासी भोग के लिए 7500 रुपये और शृंगार के लिए 20 हजार रुपये शुल्क देने होंगे।