असि संगम ने शंख, डमरू और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ मंदिरों को बचाने के लिए जनांदोलन का शुभारंभ हुआ। विकास के नाम पर काशी की धरोहरों, सैकड़ों साल पुराने मंदिरों और देव विग्रहों को जमींदोज करने के विरुद्ध संतों व आम नागरिकों ने पैदल मार्च निकाला। अस्सी घाट से निकलकर यह पैदल यात्रा वरुणा के संगम पर समाप्त हुई। इसमें विरोध मार्च में साधु-संत, बटुक, महंत व आम नागरिकों ने हिस्सा लिया।
सोमवार को असि संगम पर मंदिर बचाओ आंदोलनम् की शुरुआत करते हुए ज्योतिष एवं शारदापीठाधीश्वर, शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य व श्री विद्यामठ के प्रभारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि काशी में आस्था पर कुठाराघात किया जा रहा है।
काशी के उन पौराणिक मंदिरों जिनकी वर्षों से पूजा-अर्चना होती चली आ रही है, सौ करोड़ सनातनधर्मियों की आस्था के केंद्र हैं उन्हें विकास के नाम पर तोड़कर मलबा बनाकर फेंकने की कोशिश की जा रही है।
पीएम मोदी ने काशी में वह काम किया है जो कभी आक्रांताओं ने करने की कोशिश की थी। लेकिन काशी के नागरिक और साधु-संत ऐसा नहीं होने देंगे। अब मंगलवार से रोजाना आठ दिनों तक अलग-अलग घाटों पर विविध समुदाय के लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन होगा। फिर 16 मई से काशी यात्रा शुरू होगी जिसका समापन 29 मई को होगा।