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Varanasi News: 'रेलकर्मी की विधवा को मिले 60 फीसदी पेंशन', कार्यकर्ता सम्मेलन में बोले AIRF के महामंत्री

Wed, 17 Jul 2024 09:02 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: पुरानी पेंशन बहाली को लेकर ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन और नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने विस्तृत तरीके से अपनी बात रखी। साथ ही इसके फायदे को लेकर भी कर्मचारियों को बताया। बैठक में उन्होंने विभिन्न मांगों को भी उठाया।
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कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अतिथि। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन और नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली का आंदोलन अपने अंतिम चरण में है। 

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15 जुलाई को हुई चर्चा में सरकार का सकारात्मक रुख सामने आया है। सरकार से हम कोई चांद, तारे थोड़ी मांग रहे हैं। जो हमारी तनख्वाह है, जिस पर रिटायर हो रहे हैं उसका आधा ही पेंशन के रूप में मांग रहे हैं। सरकार 30 प्रतिशत देने पर राजी है, हमारी मांग है कि 50 प्रतिशत मिले। रेलकर्मी की विधवा को 60 प्रतिशत पेंशन दी जाए। केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय से बातचीत हो रही है।

कैंट रेलवे स्टेशन के सामुदायिक केंद्र में बुधवार को कार्यकर्ता सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि ओपीएस पर केंद्र सरकार ने तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित की है। 
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उन्होंने आठवें वेतन आयोग के गठन कैडर रिस्ट्रक्चरिंग, एलडीसीई ओपेन टू ऑल विषयों पर कार्यकर्ताओं से चर्चा की। कर्मचारियों को यूनियन की मान्यता के लिए संभावित गुप्त मतदान की तैयारियों के लिए सुझाव दिये। सम्मेलन को डॉ. प्रदीप शर्मा, राजेश सिंह, सुनील कुमार सिंह, डीके सिंह, राजकुमार, चंद्रशेखर यादव, एनबी सिंह आदि ने भी संबोधित किया। 

इसके पूर्व शिवगंगा एक्सप्रेस से सुबह बनारस स्टेशन पहुंचे शिवगोपाल मिश्रा का नॉर्दर्न ईस्टर्न रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) ने स्वागत किया। इसमें एनबी सिंह, राणा राकेश रंजन, कन्हैया सिंह, मनोज कुमार सिंह, चंद्रशेखर सिंह रहे।

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22 को लखनऊ में प्रदर्शन
मुख्य वक्ता मंडल मंत्री (लखनऊ) आरके पांडेय ने कहा कि कर्मचारियों की समस्या के समाधान के लिए 22 जुलाई को लखनऊ के डीआरएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा।

रेलवे का निजीकरण असंभव, रेल कर्मियों के हाथों में सुरक्षित है रेल
शिवगोपाल मिश्रा ने पत्रकारों से कहा कि भारतीय रेलवे का निजीकरण असंभव है। यूपीए ने कोशिश की है, एनडीए शासन आया तो कोशिश की। रेल का निजीकरण संभव नहीं है। कुछ ऐसे काम हैं, जो कि निजी क्षेत्रों में जा रहे हैं।



खास तौर पर ट्रैक मेंटेनेंस, कुछ इलेक्ट्रिक भी है। हालांकि परिचालन संभव नहीं है। रेल कर्मियों के सुरक्षित हाथों में रेल है। आने वाले समय में रेल कर्मचारियों का काम बढ़ेगा, ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी। वंदे भारत चल रही है, अमृत भारत ट्रेनें आएंगी। पहले साढ़े 11 हजार फ्रेट ट्रेन थी, जो कि अब साढ़े 13 हजार हो गई हैं। 

परिचालन, मेंटनेंस के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। उपभोक्ताओं को संतुष्टि निजी से नहीं बल्कि सरकारी में ही होगी। न्यू जलपाईगुड़ी ट्रेन हादसे में क्या था कि लोको पायलट चार रात से जगा था, नियम तोड़कर ड्यूटी कराई जाएगी तो फिर चीजें प्रभावित होंगी।
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