साथ ही, सभी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए उनकी संपत्ति के कुर्की का आदेश पुलिस को दिया था। अदालत ने कहा था कि इस मामले में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट एडीसीपी काशी जोन कोर्ट में पेश करेंगे। कोर्ट के सख्त रुख के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में आवेदन पत्र दाखिल किया गया था।
अदालत ने कहा कि 7 वर्ष पुराने मामले में अविमुक्तेश्वरानंद को कोर्ट में तलब किये जाने के बावजूद पेश नहीं होने पर पहले गैर जमानती वारंट फिर फरार घोषित किया गया। इसके बाद भी हाजिर नहीं होने पर कुर्की का आदेश कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 83 के तहत जारी किया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्तों को देखते हुए अग्रिम जमानत दिए जाने का कोई आधार नहीं बनता और अग्रिम जमानत अर्जी खारिज की जाती है। कोर्ट के ऑर्डर के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ अन्य आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गंगा में गणेश प्रतिमा विसर्जन पर अड़े स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद समेत अन्य लोगों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में पांच अक्तूबर 2015 को मैदागिन स्थित टाउनहाल मैदान से निकली प्रतिकार यात्रा में भगदड़, आगजनी, बवाल हुआ था।