अमर उजाला की पड़ताल में पता चला कि प्राथमिक विद्यालय मंडुवाडीह में सुबह दस बजे मध्याह्न भोजन आया। उसमें दूध नहीं था। हेडमास्टर सरिता राय ने बताया कि तीन सितंबर से स्वयंसेवी संगठन द्वारा पका हुआ भोजन भेजा रहा है, लेकिन हर बुधवार को सिर्फ तहरी ही दी जाती है। जब संस्था से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आप अपनी तरफ से बच्चों को उपलब्ध करा दीजिए। जो वित्तीय खर्च होंगे वो संस्था वहन करेगी। बुधवार को जब हेडमास्टर ने अपनी तरफ से बच्चों को दूध उपलब्ध करा दिया तो संस्था ने कहा कि हम अभी दूध नहीं दे पाएंगे। आप मध्याह्न भोजन की डायरी में दूध के आगे शून्य कर दीजिए।
कंपोजिट विद्यालय महेशपुर में जब मध्याह्न भोजन की गाड़ी पहुंची तो उसमें दूध नहीं था। हेडमास्टर नगीना सिंह ने पूछा तो बताया गया कि मैडम आज सिर्फ तहरी ही आई है, हम अभी दूध नहीं दे सकते हैं। कुछ ऐसा ही हाल प्राथमिक विद्यालय ककरमत्ता और कंपोजिट विद्यालय अर्दली बाजार में भी रहा।
मध्याह्न भोजन को लेकर लगातार विद्यालयों से शिकायतें आ रही हैं। स्वयंसेवी संगठनों की शनिवार को बैठक बुलाई गई है। बैठक के बाद जो भी समस्याएं होगी उसका समाधान किया जाएगा। - राकेश सिंह, बीएसए।