बता दें कि 16 अगस्त को पीड़िता और गवाह के आत्मदाह के बाद गाजियाबाद में तैनात रहे वाराणसी के तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक को पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। उधर, कैंट थाने में पीड़िता और गवाह के खिलाफ दर्ज मुकदमे में पुलिस की लापरवाही पर इंस्पेक्टर राकेश सिंह और विवेचक गिरजा शंकर यादव को निलंबित कर दिया गया था।
गलत टिप्पणी पर सीओ किए गए थे निलंबित
आरोपी सांसद अतुल राय मामले में सबसे पहली गाज भेलूपुर के तत्कालीन सीओ अमरेश सिंह बघेल पर गिरी थी। सीओ ने अपनी जांच रिपोर्ट में सांसद को क्लीन चिट देने का प्रयास किया था और बाद में पीड़िता पर टिप्पणी भी की थी। इसके बाद शासन ने सीओ अमरेश सिंह बघेल को निलंबित कर दिया था और इस मामले की जांच आईजी रेंज प्रयागराज को सौंपी है।
पीड़िता ने 10 नवंबर 2020 को तत्कालीन एसएसपी वाराणसी को आरोपी सांसद और उनके लोगों की ओर से दी जा रही मानसिक व शारीरिक यातनाएं दिए जाने की शिकायत की थी। अतुल राय के लोग केस कमजोर करने और साक्ष्य मिटाने का प्रयास कर रहे हैं। उसने यह भी शिकायत की थी कि मेरे गवाह के नाम को किसी अपराधी के साथ जोड़कर दिखाया जा रहा है। इससे व्यथित मेरे गवाह ने आत्मदाह करने की बात कही है।
मंडुवाडीह थाने का हिस्ट्रीशीटर है आरोपी सांसद
आरोपी सांसद अतुल राय मंडुवाडीह थाने का हिस्ट्रीशीटर है और लंबे समय तक मऊ सदर विधायक माफिया मुख्तार अंसारी की शार्गिदगी में अवैध कारोबार संभालने का भी आरोप है। वाराणसी में अतुल राय की लंबी-चौड़ी टीम है। पीड़िता लगातार इन्हीं लोगों के खिलाफ धमकी देने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाती थी। मगर, पुलिस ने सांसद के गुर्गों की पहचान तक नहीं की थी।