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ब्लेड से भी तेज धार: वाराणसी में चीनी मांझे से बरेका कर्मी की बाल-बाल बची जान, लहूलुहान हाल में खुद पहुंचा अस्पताल, गर्दन और हाथ में लगे टांके

Thu, 13 Jan 2022 08:27 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

आसमान में उड़ती पतंगों को काटने की होड़ में बेजुबानों और इंसानों की जिंदगी खतरे में डाल रहा है चीनी मांझा। वाराणसी में गुरुवार को बरेका कर्मी की जान बाल-बाल बची। ब्लेड से भी तेज धार जैसे चीनी मांझे ने बरेका कर्मी का गला और हथेली रेत दिया। 
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चीनी मांझे से बरेका कर्मी घायल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मकर संक्रांति आते ही हर तरह पतंगबाजी शुरू हो गई है। इसके साथ ही पतंगों के खतरनाक मांझे से हादसे भी सामने आने लगे हैं। वाराणसी में एक ऐसे ही हादसे में बरेका (बनारस रेल कारखाना) कर्मी की जान बाल-बाली बची। ककरमत्ता ओवर ब्रिज पर गुरुवार की शाम जानलेवा चीनी मांझे ने बरेका कर्मी पंकज पांडेय (35) का गला और हथेली रेत दिया।

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लहूलुहान हाल में बरेका कर्मी किसी तरह बाइक से बरेका स्थित केंद्रीय अस्पताल पहुंचा, जहां चिकित्सकों ने गले और हाथ में टांके लगाए। इस घटना से बरेका कर्मियों के परिवार में खौफ है।  भेलूपुर थाना अंतर्गत बड़ी पटिया निवासी पंकज पांडेय बरेका स्थित लोको फ्रेम में इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्शन में इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत है।

शाम को बाइक से नाइट ड्यूटी के लिए बरेका जा रहे थे। जैसे ही ककरमत्ता ओवर ब्रिज पर बाइक से पंकज पहुंचे कि अचानक सामने से आए चीनी मांझे की चपेट में आ गए। जानलेवा चीनी मांझे से पंकज का गला बुरी तरह कट गया और गला बचाने में हाथ लगाने पर चीनी मांझे से हथेली भी जख्मी हो गया।
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बरेका अस्पताल में भर्ती, गर्दन और हाथ में लगे टांके

दर्द से छटपटाते लहूलुहान हाल में पंकज किसी तरह बाइक से सीधे बरेका स्थित केंद्रीय अस्पताल पहुंचे और परिजनों सहित सह कर्मियों को घटना की सूचना दी। तुरंत मौके पर पहुंचे बरेका कर्मी नवीन सिन्हा सहित अन्य ने तुरंत उपचार शुरू कराया। बुरी तरह जख्मी गले और हथेली सहित अंगूठे में चिकित्सकों ने टांके लगाए। इस घटना से कर्मियों में काफी रोष रहा, मांग किया कि पुलिस चीनी मांझे की अवैध बिक्री पर रोक लगाए।

‘मौत के मांझे’ पर पुलिस नहीं लगा पा रही लगाम

जानलेवा और प्रतिबंधित चीनी मांझे की बिक्री वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस नहीं रोक पा रही है। लिहाजा, हर दिन चीनी मांझे का शहरवासी शिकार हो रहे हैं। आम लोग ही नहीं बल्कि बेजुबान भी चीनी मांझे से घायल हो रहे हैं। पिछले साल चीनी मांझे की जद में आकर बाइक सवार की मौत हो चुकी है। जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। कारोबारियों ने बिक्री का तरीका बदलते हुए अब गोदाम से बेच रहे हैं।
 

प्रतिबंधित धातु मिश्रित चायनीज मांझा - फोटो : Vishnu Sharma
मकर संक्रांति पर चोरी छिपे गली, मोहल्ले और प्रमुख बाजारों में चीनी मांझे की बिक्री बढ़ गई है। त्योहार से पहले ही दिल्ली, बरेली, आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश केविभिन्न जिलों से चोरी छिपे जानलेवा चीनी मांझा शहर में आता है।

यहीं से पूर्वांचल और बिहार के विभिन्न जिलों में बिक्री की जाती है। आए दिन इसकी चपेट में आने से पशु-पक्षी भी घायल होते हैं। पतंगबाजी के शौकीन बड़े लोगों के साथ ही बच्चों के हाथ में भी चीनी मांझा आसानी से देखा जा सकता है।
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इसलिए खतरनाक होता है चीनी मांझा

जानकारों के अनुसार, चीनी मांझा मैटेलिक पाउडर, नायलॉन, लोहे व कांच के चूरे को मिलाकर बनाया जाता है, इस वजह से इसमें खिंचाव ज्यादा होता है और यह आसानी से टूटता नहीं है। चीनी मांझे की कीमत भी देसी मांझे से कम होती है।

चीनी मांझा इस समय बाजारों में 650 से 750 रुपये प्रति किलोग्राम में बिक रहा है। वहीं अंटा में बात करें तो 50 रुपये से लेकर तीन सौ रुपये तक है। हालांकि पुलिस के भय से दुकानदार विश्वसनीय लोगों को ही माल देते हैं। यानी कि पुराने ग्राहकों को ही माल दिया जा रहा है। अधिकतर कारोबारियों ने तो सीधे गोदाम से माल बिक्री पर जोर दे रहे हैं।
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