दर्द से छटपटाते लहूलुहान हाल में पंकज किसी तरह बाइक से सीधे बरेका स्थित केंद्रीय अस्पताल पहुंचे और परिजनों सहित सह कर्मियों को घटना की सूचना दी। तुरंत मौके पर पहुंचे बरेका कर्मी नवीन सिन्हा सहित अन्य ने तुरंत उपचार शुरू कराया। बुरी तरह जख्मी गले और हथेली सहित अंगूठे में चिकित्सकों ने टांके लगाए। इस घटना से कर्मियों में काफी रोष रहा, मांग किया कि पुलिस चीनी मांझे की अवैध बिक्री पर रोक लगाए।
जानलेवा और प्रतिबंधित चीनी मांझे की बिक्री वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस नहीं रोक पा रही है। लिहाजा, हर दिन चीनी मांझे का शहरवासी शिकार हो रहे हैं। आम लोग ही नहीं बल्कि बेजुबान भी चीनी मांझे से घायल हो रहे हैं। पिछले साल चीनी मांझे की जद में आकर बाइक सवार की मौत हो चुकी है। जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। कारोबारियों ने बिक्री का तरीका बदलते हुए अब गोदाम से बेच रहे हैं।
प्रतिबंधित धातु मिश्रित चायनीज मांझा
- फोटो : Vishnu Sharma
मकर संक्रांति पर चोरी छिपे गली, मोहल्ले और प्रमुख बाजारों में चीनी मांझे की बिक्री बढ़ गई है। त्योहार से पहले ही दिल्ली, बरेली, आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश केविभिन्न जिलों से चोरी छिपे जानलेवा चीनी मांझा शहर में आता है।
यहीं से पूर्वांचल और बिहार के विभिन्न जिलों में बिक्री की जाती है। आए दिन इसकी चपेट में आने से पशु-पक्षी भी घायल होते हैं। पतंगबाजी के शौकीन बड़े लोगों के साथ ही बच्चों के हाथ में भी चीनी मांझा आसानी से देखा जा सकता है।
जानकारों के अनुसार, चीनी मांझा मैटेलिक पाउडर, नायलॉन, लोहे व कांच के चूरे को मिलाकर बनाया जाता है, इस वजह से इसमें खिंचाव ज्यादा होता है और यह आसानी से टूटता नहीं है। चीनी मांझे की कीमत भी देसी मांझे से कम होती है।
चीनी मांझा इस समय बाजारों में 650 से 750 रुपये प्रति किलोग्राम में बिक रहा है। वहीं अंटा में बात करें तो 50 रुपये से लेकर तीन सौ रुपये तक है। हालांकि पुलिस के भय से दुकानदार विश्वसनीय लोगों को ही माल देते हैं। यानी कि पुराने ग्राहकों को ही माल दिया जा रहा है। अधिकतर कारोबारियों ने तो सीधे गोदाम से माल बिक्री पर जोर दे रहे हैं।