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बनारस के लिए एक और सौगात, आईएमएस बीएचयू में मिलेगी एम्स जैसी सुविधाएं 

Sun, 05 Aug 2018 02:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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बीएचयू में मौजूद मंत्री - फोटो : अमर उजाला
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आईएमएस बीएचयू का नाम भले ही एम्स न हो लेकिन इसका दर्जा कम नहीं होगा। यहां वो सभी सुविधाएं मिलेंगी जो एम्स में मिलती हैं। यहां एम्स की तरह बेड, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टॉफ, इमरजेंसी सेवाएं सब मिलेंगी।
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शनिवार को बीएचयू केएन उडप्पा सभागार में इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर हुआ। आईएमएस बीएचयू भारत का पहला ऐसा संस्थान हैं, जहां एम्स की तरह की सभी सुविधाएं मिलेंगी।

आईएमए में एम्स जैसी सुविधाएं दिए जाने की पहल दो साल से चल रही थी लेकिन इस साल मार्च के बाद इसमें तेजी आई। पहले आईएमएस की ओर से इसका प्रस्ताव भेजा गया बाद में तीन बार दिल्ली में बैठक होने के बाद 19 जून को आईएमएस और एम्स के बीच आपसी समझौता हुआ।
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इसके बाद एम्स की दस सदस्यीय टीम ने यहां आकर सुविधाओं का मूल्यांकन किया। आखिर चार अगस्त को वो सपना साकार हुआ, जिसका सभी को इंतजार था। कुलपति प्रो. राकेश भटनागर की मौजूदगी में दोनों मंत्रालयों के बीच अनुबंध के बाद अब वो सभी सुविधाएं मिल जाएंगी, जो अब तक नहीं मिल पा रही थी।

मार्च 2019 तक शुरू हो जाएगा सुपर स्पेशियलिटी

एमओयू करते मानव संसाधन विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी।
समारोह में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि एम्स की मांग चल रही थी लेकिन मंत्रालय के सामने समस्या यह थी कि महामना की भावनाओं और बीएचयू एक्ट का पालन नहीं हो पा रहा था। बीएचयू, एमएचआरडी और महामना की इच्छा शक्ति थी कि सब कुछ एक कैंपस में हो।

एम्स एक एक्ट के तहत चल रहा है, जिसका आधारभूत, प्रशासनिक ढ़ांचा और उसका गवर्निंग सिस्टम अलग है। अब वो इसके बीच में नहीं आ सकता है। भावनाओं को संभालकर चलना और लक्ष्य तक पहुंचना है हमने तय कर लिया था। दोनों मंत्रालयों के नियम अलग है। बहुत पहल के बाद अब जाकर इसका रास्ता निकला। सभी प्रकार की सुविधाएं, खर्चा स्वास्थ्य मंत्रालय देगा।

हयूमन रिसोर्स का पैरामीटर का काम आईएमएस, सपोर्ट एमएचआरडी करेगा। लाइक शब्द इसलिए आया कि मंत्रालय एमएचआरडी की हे। जैसा शब्द ऐसा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय सब कुछ करेगा। अस्पताल, ट्रामा सेंटर आदि में बेड, संसाधन की संख्या बढ़ेगी, 200 करोड़ का सुपर स्पेशियलिटी मार्च 2019 तक शुरू हो जाएगा।

पंद्रह दिन के भीतर की जाएगी मानीटरिंग

कार्यक्रम में बोलते प्रकाश जावड़ेकर - फोटो : अमर उजाला
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि एम्स एक सपना था, दो साल में संकल्प किया और अब एमओयू के बाद साकार हो गया। दो साल पहले चर्चा चल रही थी कि यहा एम्स शुरू करेंगे। लेकिन तत्कालीन एमएचआरडी राज्यमंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने बीएचयू स्थापना और इसकी की विशेषता, मालवीय जी के संकल्प के बारे में बताया।

चिकित्सा विज्ञान से कृषि विज्ञान संस्थान, इंजीनियरिंग से विज्ञान तक सब है यहां। इससे कोई अलग हो ये लोगों को ठीक नहीं लगेगा। इसलिए चर्चा हुई कि एम्स ही बनेगा लेकिन बीएचयू का ही रहेगा। चार साल में तो बहुत काम किया लेकिन अगर एक काम सबसे बड़ा आज हुआ, यहां एम्स दिया है। पंद्रह दिन के भीतर मानीटरिंग की जाएगी।

समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल, अश्विनी कुमार चौबे, संचार मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा, प्रदेश के प्राविधिक और चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, एम्स डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया आदि लोग मौजूद रहे। 
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दो साल में चार बैठक, और पूरा हुआ सपना

बीएचयू अस्पताल - फोटो : self
बीएचयू को एम्स मिले, इसका सपना दो साल पहले देखा गया था। इसके लिए कागजी कार्रवाई तो खूब हुई लेकिन चार बैठकों के बाद आखिर सपना पूरा हुआ। यहां केवल एम्स नाम ही नहीं बल्कि वो सभी चिकित्सकीय सुविधाएं दी जाएंगी जो एम्स में जाने वाले मरीजों को मिल रही हैं।

पहले की तुलना में जहां 700 बेड बढ़ेगा वहीं चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टॉफ की संख्या भी 2500 से अधिक बढ़ जाएगी। अब लोगों को संसाधनों की कमी से जूझना नहीं पड़ेगा। अब स्वास्थ्य मंत्रालय और मानव संसाधन मंत्रालय के बीच एमओयू के बाद काम शुरू हो जाएगा।

आईएमएस के अधीन चलने वाले सर सुंदर लाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में पूर्वांचल, बिहार, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, झारखंड के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से पांच हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं। सबसे अधिक परेशानी तब होती है जब बेड और संसाधनों की कमी की वजह से उन्हें वापस होना पड़ता है।

एक ओर जहां चिकित्सकों-पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है तो दूसरी ओर जांच के लिए अत्याधुनिक तकनीक की मशीन और मरीजों से जुड़ी अन्य सुविधाएं भी बढ़ानी होगी। कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने इस दौरान पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से आईएमएस में मौजूद संसाधनों के साथ ही जरूरी संसाधानों का एक ग्राफ प्रस्तुत किया।

बताया कि दो जून को पीएमओ में मीटिंग के बाद पांच, आठ, तेरह जून को नीति आयोग में बैठक हुई और अंत में 19 जून को सहमति बनी। समारोह में पूर्व कुलपति प्रो. बेनी माधव शुक्ल, डॉ. अन्नपूर्णा शुक्ला, आईएमएस निदेशक डॉ. वीके शुक्ला, सर सुंदर लाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो.विजय नाथ मिश्र, एम्स अपग्रेडेशन कमेटी के चेयरमैन डॉ. ओपी उपाध्याय, डॉ. डीके सिंह, प्रो. संजीव गुप्ता के साथ ही भाजपा के  सभी विधायक, एमएलसी मौजूद रहे।
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