मेडिसिन, नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी से रेफर होकर आते हैं मरीज
क्षेत्रीय नेत्र संस्थान बीएचयू के प्रो. दीपक मिश्रा ने बताया कि कुछ लोग सिर में दर्द और आंखों में रोशनी कम होने की समस्या लेकर ओपीडी में आते हैं। मेडिसिन विभाग, नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टर भी उन मरीजों को नेत्र रोग विभाग भेजते हैं जिनका ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है। जब जांच की जाती है तो मरीजों में हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी की पुष्टि होती है। हर ओपीडी में ऐसे 5 मरीजों रोज देखा जाता हैं। हाई ब्लड प्रेशर से आंखों की नसों में खून जमने और उसके फटने का डर रहता है।
जितने समय तक असामान्य रहेगा ब्लड प्रेशर, खतरा उतना ज्यादा
डॉक्टरों के अनुसार ब्लड प्रेशर जितना अधिक होगा और जितने लंबे समय तक बना रहेगा, आंखों को नुकसान होने का खतरा उतना अधिक रहता है। इसकी वजह से रेटिना को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में रुकावट होने लगती है। रेटिना से रक्त को दूर ले जाने वाली नसों में भी रुकावट आ जाती है। इसी वजह से आंखों की नसें फटने लगती हैं।
सिकुड़ जाती हैं नलियां, बढ़ जाती है सूजन
आईएमएस बीएचयू के नेत्र रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. आरपी मौर्य ने बताया कि हाई ब्लड प्रेशर से रेटिना (आंख के पीछे रोशनी को पहचानने वाला पर्दा) की नलियां सिकुड़ जाती हैं। सूजन आ जाती है। खून का रिसाव होता है। इन नसों से खून नलियों के बाहर आने लगता है। आंखों की नसों को पर्याप्त खून न मिलने की वजह से ऑॅप्टिक नर्व को नुकसान पहुंच सकता है। इससे व्यक्ति के देखने की क्षमता कम हो जाती है। रोशनी जाने का खतरा भी रहता है।
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हाई ब्लड प्रेशर के पुराने पीड़ितों में खतरा सबसे ज्यादा
क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के प्रो. आरपी मौर्य ने बताया कि हाई ब्लड प्रेशर के पुराने मरीजों को खतरा ज्यादा रहता है। उनके शरीर के अन्य अंगों की तुलना में आंख पर ज्यादा असर देखने को मिलता है। ब्लड प्रेशर संतुलित रखना चाहिए। डॉक्टर की सलाह पर जो सावधानी बताई जाए। बीएचयू अस्पताल के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले लोगों को मधुमेह और हाई बीपी की वजह से आंखों में होने वाली समस्याओं के प्रति जागरूक किया जाता है।