दीक्षा पाकर शहाबुद्दीन तिवारी, मुजम्मिल, फिरोज, अफरोज, सुल्तान, नगीना, शमशुनिशा बहुत खुश थे। शहाबुद्दीन तिवारी ने कहा कि हमारे पूर्वज रामपंथी थे, इसी मठ के अनुयायी थे। भले ही हमारी पूजा पद्धति बदल गई है लेकिन हमारे पूर्वज, परंपरा, रक्त और संस्कृति नहीं बदल सकती।
नौशाद अहमद दूबे ने कहा कि गुरु पीठ के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। ज्ञान तो गुरु से ही मिलेगा, जिसके पास ज्ञान है फिर वहां भेद नहीं हो सकता।
मुस्लिम महिला फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नाजनीन अंसारी ने कहा कि राम के रास्ते पर चलकर ही विश्व में शांति आ सकती है। गुरु के बिना राम तक नहीं पहुंचा जा सकता है। गुरु ही अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जा सकता है।
जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने आदिवासी समाज के बच्चों को दीक्षित कर संस्कृति के प्रसार की जिम्मेदारी सौंपी। मुस्लिम समाज के लोगों को भी कहा भारत की महान संस्कृति को दुनियां के कोने-कोने तक पहुंचाएं और अपने पूर्वजों से जुड़े।