प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गंगा के प्रदूषण पर नजर रखने के लिए बिजनौर से गाजीपुर तक 30 मॉनिटरिंग स्थल स्थापित किए गए हैं। अक्तूबर की रिपोर्ट के अनुसार मिर्जापुर, वाराणसी सहित 15 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर प्रदूषण के हालात अधिक खराब यानि डी श्रेणी में मिले हैं। अक्तूबर 2018 व अक्तूबर 2020 के जल गुणवत्ता आंकड़ों के तुलनात्मक विश्लेषण में 50 फीसदी मॉनिटरिंग स्थलों पर प्रदूषण काफी अधिक मिला है। प्रदेश के मुख्य सचिव आरके तिवारी ने बृहस्पतिवार को हुई बैठक में जिले में गंगा में प्रदूषण की स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की क्षेत्रीय इकाइयों को व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया है।
वाराणसी में शुक्रवार को शीतला घाट पर फैली गंदगी।
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नहीं बंद हो सके हैं नाले
विश्वसुंदरी पुल से राजघाट के बीच गंगा में सीधे सीवेज और नालों का गिरना बंद नहीं हुआ है। अस्सी और वरुणा के संगम के अलावा रामनगर की ओर से भी गंगा में सीधे सीवेज का पानी मिल रहा है। शासन की ओर से वहीं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से शोधन किए बिना पानी गंगा में गिराया जा रहा है। दीनापुर एसटीपी से बिना शोधन किए पानी गंगा में बहाने पर जुर्माने की कार्रवाई की गई थी।
33 फीसदी सीवेज सीधे गिर रहा गंगा में
शहर का लगभग 33 प्रतिशत गंदा पानी सीधे गंगा में प्रवाहित हो रहा है। इसमें मल-कीचड़ भी शामिल है। गंगा प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह असि नदी है। यहां से प्रतिदिन गंगा नदी में 50 एमएलडी से अधिक सीवर गिरता है। शहर का लगभग एक चौथाई सीवर का पानी विभिन्न नालों से होते हुए असि में मिलता है। वहीं आदिकेशव घाट पर वरुणा से भी सीवेज गंगा में मिल रहा है।