सिविल कोर्ट परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत मेें 16,528 मुकदमों का निस्तारण हुआ। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की लोक अदालत का शुभारंभ जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने किया। वहीं, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय पीके सिंह के प्रयास से पांच दंपती ने अपने मतभेदों को भुलाकर साथ रहने का संकल्प लिया। महिला अधिवक्ता माधुरी सिंह के अनुसार, उनका मुवक्किल अधिकारी है। दोनों को एक पुत्र भी है। सास व देवर से विवाद के बाद पत्नी बनारस से दिल्ली चली गई और वही नौकरी करने लगी। पति की तरफ से मुकदमा किया गया और दूसरी ही तारीख में सफलता मिल गई। शनिवार को पति-पत्नि हंसी खुशी साथ-साथ गए और मुकदमे बाजी का अंत हुआ। अधिवक्ता अनिल उपाध्याय भी पति-पत्नी को एक करने में कामयाब रहे और दंपती का माल्यार्पण करवाकर परिवार न्यायाधीश पीके सिंह ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
इस दौरान जिला जज ने कहा कि न्यायिक अधिकारी सुलह समझौतों के आधार पर लंबित मामलों को निस्तारित करवाएं। इससे दोनों पक्ष संतुष्ट रहते हैं और शांति बनी रहती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव कुमुदलता त्रिपाठी के अनुसार, 73 पारिवारिक मामले, दीवानी के 323, मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति के 30 मामलों में एक करोड़ 87 लाख की क्षतिपूर्ति दिलवाने, फौजदारी के 4189 मामलों में 10 लाख 80 हजार जुर्माना, एनआई एक्ट के 29 मामले आए। वहीं, कामर्शियल कोर्ट के 24, प्री लिटिगेशन के 2424 मामलों में 9 करोड़ 76 लाख की वसूली, बीएसएनएल के 165 मामलों में सवा 4 लाख का समझौता और प्रशासन व अन्य विभागों के 9271 मामलों में 9 करोड़ 80 लाख 69 हजार की वसूली की गई। लोक अदालत के नोडल अधिकारी एडीजे प्रथम संजीव सिन्हा, संयोजक अनूप श्रीवास्तव, यूनियन बैंक के क्षेत्रीय व अंचल प्रमुख सुनील व न्यायिक अधिकारी विकास कुमार, अधिवक्ता व बड़ी संख्या में वादकारी शामिल रहे।