कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों में संक्रमण की आशंका को देख शासन ने अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में गंभीर बच्चों को भर्ती करने के लिए पीआईसीयू, एनआईसीयू बनवाया। साथ ही डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को स्पेशल ट्रेनिंग भी दी गई है। इस बीच शासन के निर्देश पर ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोलापुर, गंगापुर पिंडरा समेत छह सीएचसी पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चला।
एडिशनल सीएमओ ने भी मॉक ड्रिल की मॉनिटरिंग कर जरूरी सुझाव दिए। 30 बेड वाले वार्ड में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के प्रयोग, स्वास्थ्य केंद्रों पर बच्चों के इलाज से जुड़ी दवाइयां, जांच की व्यवस्था का मूल्यांकन किया गया। सीएमओ डॉक्टर वीबी सिंह ने बताया कि मॉकड्रिल के बाद अब नोडल अधिकारियों की ओर से शासन को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की तैयारियां कराई जाएंगी।
मॉक ड्रिल के दौरान एक डमी कोविड संक्रमित बच्चे को एंबुलेंस से उसके अभिभावक के जरिए डॉक्टर के पास लाया गया। कोविड-19 प्रोटोकॉल के अनुसार चिकित्सा कर्मियों के द्वारा उस बच्चे को प्रिजम्प्टिव बेड पर प्रारम्भिक जांच कर आईसीयू बेड तक ले जाया गया। इस दौरान चिकित्सक एवं चिकित्सा कर्मियों द्वारा इलाज के समस्त मानकों अनुपालन किया गया ।