167 जर्जर भवनों अब तक नहीं हुए ध्वस्त
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में कुल 249 विद्यालय ऐसे थे, जो जर्जर थे। जिसमें से प्रथम चरण में 20 व दूसरे चरण में 62 विद्यालयों को ध्वस्त किया जा चुका है। जिसके बाद जिले में 167 विद्यालय ऐसे बचे है, जो अभी भी जर्जर है। लेकिन विभागीय पेंच फंसने के कारण अब तक उनको लेकर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि शनिवार को जिस प्राथमिक कन्या विद्यालय की छत गिरी है वो 2005 में ही जर्जर घोषित हो चुका है। बच्चों को पढ़ने के लिए दो नए कमरों का निर्माण कराया है। वर्तमान में कक्षाएं उसी में संचालित होती हैं। वहीं प्राथमिक विद्यालय लोहता व प्राथमिक विद्यालय महेशपुर में नए भवन का निर्माण हो हुआ है। लेकिन जर्जर भवन अभी भी उसी परिसर में है, जिसे अब तक ध्वस्त नहीं किया जा सका है।
बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि जिले के जर्जर स्कूली भवनों का चिन्हांकन किया गया है। जिन विद्यालयों के मलबे का आंकलन पांच लाख तक आता है उनका ध्वस्तीकरण शासन स्तर से किया जाता है।