एसटीएफ की वाराणसी इकाई के इनपुट के आधार पर छह अप्रैल 2017 को तत्कालीन चौबेपुर थानाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार तिवारी ने गाजीपुर के मरदह निवासी शार्प शूटर अजय मरदह व आशुतोष सिंह सनी और बिहार के भभुआ निवासी नागेंद्र सिंह उर्फ राजू बिहारी को गिरफ्तार किया था। फिलहाल अजय मरदह और राजू बिहारी जेल में ही निरुद्ध हैं, जबकि आशुतोष जमानत पर बाहर है। अमरनाथ ने कहा कि वारदात को अंजाम देने वाले शूटरों और साजिशकर्ताओं को भी सजा मिले तभी उनके पिता की आत्मा को शांति मिलेगी।
...और तब विधायक सुशील गिरफ्तारी का विरोध करने पहुंचे थे
छह अप्रैल 2017 की सुबह चौबेपुर थाने की पुलिस अजय मरदह, आशुतोष और राजू बिहारी को गिरफ्तार करने चांदमारी स्थित एक अपार्टमेंट के फ्लैट पहुंची थी। तीनों की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए विधायक सुशील सिंह मौके पर पहुंचे थे। घंटों की हुज्जत के बाद भी पुलिस ने विधायक की एक न सुनी थी और तीनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत बताते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद विधायक सुशील सिंह का नाम दर्ज मुकदमे में साजिशकर्ता के तौर पर विवेचना में पुलिस ने शामिल किया। हालांकि बाद में चौबेपुर थाने की पुलिस ने ही विधायक सुशील को क्लीन चिट दे दी थी।
पुलिस ने भरोसा तोड़ा तो गए न्यायालय की शरण में
अमरनाथ चौबे ने बताया कि उनके पिता की हत्या के मुकदमे की विवेचना में आठ विवेचक बदले गए। पुलिस हमारे द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्य और तथ्यों की लगातार अनदेखी करती रही और इसके पीछे अजब-गजब तर्क दिए जाते थे।
इससे निराश होकर हम सितंबर 2018 में उच्चतम न्यायालय की शरण में गए। इसके बाद भी पुलिस यही कहती थी कि अब इस प्रकरण में कुछ खास नहीं बचा है और न्यायालय की शरण में जाने से भी कोई फायदा नहीं होगा। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद अब मन में यह विश्वास जगा है कि हमें एक न एक दिन न्याय और पिता की आत्मा को शांति जरूर मिलेगी।