नौका संचालन के दौरान यह हादसे का कारण बन सकती है। प्रो. मिश्र ने कहा कि नदी वैज्ञानिकों की राय को दरकिनार करते हुए 11 करोड़ रुपये से ज्यादा पानी में बहा दिया गया। रेत से बनी नहर में रेत जानी शुरू हो गई है। प्रो. मिश्र ने छह जून को कहा था कि नहर निर्माण से नदी के पश्चिम में सिल्ट का जमाव होगा और नहर बाढ़ में समाहित हो जाएगी।
किस वजह से बनाई नहर, आज तक नहीं समझ आया
नदी वैज्ञानिक प्रो. यूके चौधरी ने भी गंगा में नहर बनाने पर सवाल उठाए थे लेकिन किसी ने उनकी बातों को नहीं सुना। प्रो. चौधरी ने कहा कि किस वजह से नहर बनाई जा रही है यह आज तक किसी को समझ में नहीं आया। बिना किसी सर्वे और अध्ययन के नहर बनाने का नतीजा आज सभी के सामने है। नहर से गंगा का फ्लोर डायनेमिक्स प्रभावित हुआ है और इसके चलते वाराणसी में गंगा का अर्द्धचंद्राकार स्वरूप भी प्रभावित होगा। गंगा के डाउन स्ट्रीम में कटान बढ़ेगा और घाटों पर खतरा बढ़ जाएगा।