आईएमएस बीएचयू के माइक्रो बायोलॉजी लैब में वाराणसी समेत अन्य जिलों की रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमर चेन रिएक्शन (आरटीपीसीआर) जांच बंद कर दी गई है। जांच के बकाए 11 करोड़ रुपये न मिलने पर यह फैसला किया गया है। लैब में दोबारा जांच कब शुरू होगी। इसके बारे में कुछ नहीं कहा सकता है। हालांकि, एमआरयू लैब में अभी भी कुछ जिलों की जांच चल रही है।
कोरोना काल में माइक्रो बायोलॉजी लैब में वाराणसी के साथ ही चंदौली, मऊ, गाजीपुर, जौनपुर सहित आसपास के जिलों के सैंपलों की जांच हो रही थी। जब कोरोना संक्रमण पीक पर था, तब हर दिन औसतन दस से बारह हजार सैंपल आते थे। जांच के बाद इनकी रिपोर्ट माइक्रोबायोलॉजी लैब की ओर से संबंधित जिलों को नियमानुसार भिजवाए जाते थे। जब से संक्रमण कम हुआ है तब से सैंपलों की संख्या भी कम हो गई है। कोरोना काल में आरटीपीसीआर जांच के लिए प्रयोग होने वाले सामानों सहित अन्य मद में लैब का 11 करोड़ रुपये बाकी है। भुगतान न होने से जांच पर संकट गहराया गया है। पिछले दिनोें लैब के प्रभारी ने आईएमएस निदेशक, कुलपति समेत अन्य अधिकारियों को जानकारी दी थी। आईएमएस निदेशक प्रो. बीआर मित्तल की अध्यक्षता में बैठक के बाद लैब में वाराणसी और आसपास के जिलों की जांच न करने का निर्णय हुआ। अब बकाया राशि के मिलने का इंतजार है। इधर, दो सितंबर को बीएचयू की ओर से जारी आदेश में यहां केवल सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती मरीजों की जांच कराने की जानकारी दी गई थी।
आरटीपीसीआर जांच के मद में बकाया नहीं मिलने की जानकारी मिली। कुलपति को भी अवगत कराया गया। कुलपति के निर्देश के बाद बैठक कर जांच न कराने का निर्णय लिया गया है। धन की मांग के लिए भी कुलपति को भी पत्र लिखा गया है।
-प्रो. बीआर मित्तल, निदेशक, आईएमएस बीएचयू