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सुल्तानपुर: बेटे की संदिग्ध हालात में मौत पर फौजी पिता की जिद, न्याय के लिए अंतिम सांस तक करूंगा संघर्ष

Wed, 18 Aug 2021 06:38 PM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुल्तानपुर

सार

रिटायर्ड सूबेदार शिव प्रसाद पाठक ने कहा कि उन्होंने सेना में भर्ती होकर देश की हिफाजत की है। पूरी जिंदगी देश सेवा में गुजारी है। बड़े बेटे की साजिश के तहत हत्या कर दी गई। दिल्ली पुलिस ने कोई मदद नहीं की। बेटे को इंसाफ मिले इसके लिए अंतिम सांस तक लड़ूंगा। उन्होंने कहा कि फौजी हूं, हार नहीं मानूंगा। न्याय पालिका पर पूरी आस्था है। बेटे को इंसाफ दिलाकर रहूंगा।
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डीप फ्रीजर में रखे भाई के शव को निहारती बहन। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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जब तक बेटे के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम नहीं हो जाता। मामले में एफआईआर नहीं दर्ज हो जाती, हार नहीं मानूंगा। यह जिद उस फौजी पिता की है, जो 15 दिनों से बेटे के शव को डीप फ्रीजर में रख न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। वे कहते हैं कि न्याय के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करूंगा। हादसे के बाद उनका पूरा परिवार बेहाल है। बहन अपने भाई की यादों में खोई हुई है। छोटा भाई खुद को अकेला महसूस कर रहा है। दिल्ली में हुई बेटे की संदिग्ध दशा में मौत के बाद उसके शव को डीप फ्रीजर में रख कूरेभार क्षेत्र के सरैया मझौवा के सूबेदार पाठक का पुरवा गांव निवासी शिव प्रसाद पाठक न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

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उनकी मांग है कि बेटे का शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम हो। मामले में एफआईआर दर्ज हो। इसके लिए वे उच्चाधिकारियों से लेकर कोर्ट तक की चौखट पर दस्तक दे रहे हैं। रिटायर्ड सूबेदार शिव प्रसाद पाठक ने कहा कि उन्होंने सेना में भर्ती होकर देश की हिफाजत की है। पूरी जिंदगी देश सेवा में गुजारी है। बड़े बेटे की साजिश के तहत हत्या कर दी गई। दिल्ली पुलिस ने कोई मदद नहीं की। बेटे को इंसाफ मिले इसके लिए अंतिम सांस तक लड़ूंगा। उन्होंने कहा कि फौजी हूं, हार नहीं मानूंगा। न्याय पालिका पर पूरी आस्था है। बेटे को इंसाफ दिलाकर रहूंगा।

शिवांक की बहन पूनम मिश्र गांव में डीप फ्रीजर में रखे अपने भाई के पार्थिव शरीर को निहारती रहती हैं। पूनम ने रूंधे गले से कहा कि वह प्रत्येक वर्ष अपने बड़े और छोटे भाई की कलाई पर राखी बांधती थीं। इस बार एक भाई साथ नहीं होगा।
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बड़े भाई की साजिश के तहत हत्या कर दी गई है। हमें न्याय का इंतजार है। शिवांक के जीजा महेंद्र कुमार और बहन पूनम मिश्र भी दिल्ली के मोतीनगर में रहते हैं।

महेंद्र वहीं दुकान करते हैं। साले की मौत के बाद वे पत्नी के साथ शव लेकर गांव आ गए हैं। तब से गांव में ही हैं। महेंद्र ने बताया कि शिवांक हम उम्र था। हम दोस्त की तरह से थे। शिवांक को इंसाफ दिलाने के लिए हम सब कुछ करेंगे। हमें न्याय पालिका पर पूरा भरोसा है। बड़े भाई की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से छोटे ईशांक भी गुमशुम है। बताया कि मेेरे भाई ने भविष्य के लिए काफी सपने संजोए थे। वह सारे सपने टूट गए। अपने आपको बड़ा अकेला महसूस कर रहा हूं। हादसे के बाद गांव के लोग भी हैरान हैं। बलराम मिश्र ने कहा कि शिवांक पाठक के साथ दिल्ली में जिस तरह से घटना हुई, वह बहुत दुखदाई है। समाज में ऐसी घटनाओं पर रोक लगे इसके लिए शिवांक पाठक की संदिग्ध मौत का खुलासा होना चाहिए।

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सीजेएम ने बहस सुनकर रखा आदेश सुरक्षित

रिटायर्ड सूबेदार शिव प्रसाद पाठक। - फोटो : amar ujala
रिटायर सूबेदार शिव प्रसाद पाठक ने बेटे की हत्या करने के गुनहगारों पर केस दर्ज कराने के लिए सीजेएम कोर्ट में अर्जी दी है। उनकी ओर से कोर्ट में पैरवी कर रहे अधिवक्ता जयंत मिश्र ने बताया कि सीजेएम के आदेश पर कूरेभार थाने की पुलिस ने घटना से संबंधित रिपोर्ट दिल्ली से लाने के बाद अदालत में दाखिल किया है। उन्होंने दलील दी कि सुशांत सिंह राजपूत मर्डर केस में जब मुंबई में घटना होने के बाद पटना में एफआईआर दर्ज हो सकती है तो शिवांक की दिल्ली में हत्या होने पर जिले में एफआईआर क्यों नहीं हो सकती है। संज्ञेय अपराध की सूचना देश के किसी भी थाने में दर्ज की जा सकती है। पुलिस दिल्ली की घटना बताकर अपना पल्ला झाड़ रही है। बताया कि सीजेएम किरन गौड़ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई कर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

क्या था मामला
सरैया मझौवा के पाठक का पुरवा निवासी शिव प्रसाद पाठक सेना में सूबेदार थे। रिटायर होने के बाद वे गांव आ गए। शिव प्रसाद पाठक के परिवार में पत्नी के साथ ही दो बेटे शिवांक (32), इशांक और बेटी सुनीता व पूनम हैं। पिता ने दोनों बेटियों की शादी कर दी है। बड़ा बेटा शिवांक दिल्ली में वर्ष 2012 में एक कॉल सेंटर में नौकरी करता था। इस बीच शिवांक ने दिल्ली में 24 अप्रैल 2012 को एक व्यक्ति के साथ मिलकर कंपनी खोल ली। कंपनी के पार्टनर ने दिल्ली की ही रहने वाली एक युवती को एचआर के पद पर नियुक्त किया था। शिव प्रसाद पाठक के अनुसार शिवांक ने युवती के साथ वर्ष 2013 में शादी कर ली थी। आरोप है कि कंपनी को मुनाफा होने पर पत्नी शिवांक पर कंपनी में अपने पिता व भाई को पार्टनर बनाने का दबाव बनाने लगी।

दबाव में आकर शिवांक ने दो फ्लैट पत्नी के नाम कर दिया और एक कीमती कार व 85 लाख रुपये कीमत के आभूषण भी उसे दे दिया। यह सब देने के बाद भी शिवांक के नाम काफी संपत्ति थी, जिस पर युवती व उसके परिवारीजनों की नजर थी। 19 जुलाई 2021 को शिवांक ने गांव में अपने छोटे भाई इशांक के पास फोन करके अपनी हत्या की आशंका जताते हुए पूरी बात बताई। इस पूरी बातचीत की रिकॉर्डिंग इशांक के पास मौजूद है। छोटे भाई इशांक के अनुसार एक अगस्त 2021 को दिल्ली में उसके भाई शिवांक पाठक की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। पिता दिल्ली में बेटे के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम व केस दर्ज कराना चाहते थे। ऐसा न हो पाने पर शव को लेकर गांव चले आए और शव को डीप फ्रीजर में रखकर न्याय के लिए भटक रहे हैं।
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