सोनभद्र। अब जिले में ऑक्सीजन के अभाव में मरीजों को जान नहीं गंवानी पड़ेगी। ऑक्सीजन उत्पादन के मामले में जिला आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है। कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने में विभाग जुटा है। जिले में 2450 लीटर प्रति मिनट की क्षमता के छह प्लांट पहले ही लग रहे हैं। अब दो हजार लीटर की क्षमता के दो अन्य प्लांट भी लगाने की तैयारी है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को पर्याप्त ऑक्सीजन मुहैया कराया जा सकें।
कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ऑक्सीजन समेत अन्य संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था करने मेें जुटा है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में सैकड़ों मरीजों ने ऑक्सीजन व वेंटिलेंटर के अभाव में दुनिया छोड़ कर चले गए। हालांकि दूसरी लहर के सापेक्ष इस बार ऑक्सीजन की किल्लत नहीं होगी। सात नए ऑक्सीजन प्लांट तैयार हो रहे हैं, जो एक मिनट में 2400 लीटर ऑक्सीजन देंगे। कोविड 19 के एल टू अस्पताल में एक मिनट में 45 लीटर ऑक्सीजन देने वाला प्लांट शुरू हो चुका है। वहीं एक मिनट में डेढ़ हजार लीटर ऑक्सीजन देने वाला प्लांट लगाने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। वहीं 50 बेड के बच्चों वाले हास्पिटल में भी एक मिनट में 45 लीटर ऑक्सीजन देने वाला प्लांट चालू हालत में है। सीएचसी म्योरपुर में 460, अनपरा में 477, मधुपुर और शाहगंज में एक मिनट में 45-45 लीटर ऑक्सीजन देने वाले प्लांट लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है। इनके अलावा एक-एक हजार लीटर के दो प्लांट और जिले में स्थापित होगा। इसके लिए शासन स्तर से हरी झंडी मिल गई है और जल्द ही प्लांट के आने की संभावना है। ऑक्सीजन प्लांट आने के बाद तय होगा कि ये कहां लगाया जाएगा।
जिले में 2450 लीटर प्रति मिनट की क्षमता के छह प्लांट पहले ही लग रहे हैं। इनके अलावा एक-एक हजार लीटर के क्षमता के दो अन्य प्लांट भी लगाने की तैयारी है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को पर्याप्त ऑक्सीजन मुहैया कराया जा सके। - डॉ. अमृत राय, कोविड हास्पिटल प्रभारी, सोनभद्र।