बभनी क्षेत्र के जौराही गांव में मानर की थाप पर होली खेलते आदिवासी।
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देश में अनेक सभ्यता एवं संस्कृति के लोग रहते हैं। उनमें त्योहार मनाने का अलग-अलग अंदाज है। सोनभद्र के अंतिम छोर पर बसे बभनी ब्लाक के आदिवासी बहुल गांव जौराही, कनवा, अधौरा, बरवाटोला, फरीपान, पतखिरना, देवहार पूर्वी गांव में होली मनाने का एक अलग ही चलन है। इन गांवों में एक दिन पहले होली मनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इसके वर्तमान स्वरूप में प्राचीन काल की संस्कृति की झलक दिखाई देती है। बभनी के इन सातों गांव में बुधवार की रात होलिका दहन किया गया। बृहस्पतिवार को आदिवासियों ने रंगों का त्योहार होली परंपरागत तरीके से मनाई। आदिवासी दिन भर रंगों से सराबोर होकर झूमते रहे। गांव के बड़े बुजुर्गों का कहना है कि जौराही व अन्य गांवों के आदिवासी एक दिन पहले होली परंपरा के अनुसार मनाते हैं।
मानर की थाप पर झूमे पुरुष और महिलाएं
जौराही गांव में बृहस्पतिवार को आदिवासियों ने परंपरागत तरीके से होली खेली। वहां मानर की थाप पर होली खेलने की परंपरा आज भी कायम है। जौराही गांव आदिवासी जनजाति बहुल गांव है। यहां के आदिवासी सैकड़ों वर्षों से होली एक दिन पहले मनाते हुए चले आ रहे हैं।