सीतापुर। शहर में जलभराव से लोग जूझ रहे है। यह समस्या दूर होने का नाम ही नहीं ले रही है। पांच दिन पहले हुई बारिश के बाद भी अभी तक मोहल्लों से पानी हट नहीं सका है। कई मोहल्लों के मार्गों पर पानी भरा हुआ है। गंदे पानी के बीच से होकर लोग निकलने को मजबूर हैं। यह हालात तब है जब मानसून आने से पहले नालों की सफाई पर करीब आठ लाख रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए है। इस समस्या से शहर की करीब दो लाख आबादी जूझ रही है।
सीतापुर शहर की जलनिकासी के लिए शहर में छोटे बड़े करीब 30 नाले है। इनके जरिये जलनिकासी कराई जाती है। मानसून आने से पहले जून में इनकी सफाई पर करीब आठ लाख रुपये खर्च किए गए थे। इससे लोगों को उम्मीद थी कि जब बरसात होगी तो जलनिकासी आसानी से हो जाएगी। लेकिन यह सब कागजों पर ही चलता रहा। अधिकांश नालों की तलहटी तक सफाई नहीं हो सकी।
केवल दिखावे के तौर पर ऊपरी सतह ही साफ कर दी गई। इसकी वजह से जब बरसात हुई तो यह उफनाने लगे। इससे मोहल्लों में जलभराव हो गया। यही हालात नालियों के भी रहे। नालियों में केवल ऊपरी तरीके से सफाई करा दी। अभी पांच दिन पहले दो दिन तक जोरदार बरसात हुई थी। इस बरसात की वजह से नाले चोक हो गए थे। जिसके कारण कई मोहल्लों में आज भी पानी भरा हुआ है। इससे लोगों को निकलने में तमाम तरह की दिक्कतें उठानी पड़ रही है। वह गंदे पानी के बीच से होकर निकलने को मजबूर हो रहे है।
प्लाटों में भरा हुआ पानी
शहर में जलनिकासी का संकट दशकों पुराना है। शहर के नवविकसित कॉलोनियों में जलनिकासी का कोई इंतजाम नहीं है। जबकि यहां के लोग बराबर नगर पालिका को हाउस टैक्स देते है। अगर बात नारायन टाकीज के सामने वाले मोहल्ले की जाए तो यहां पर खाली पड़े प्लाटों में पानी भरा हुआ है। लोगों के घरों के अंदर तक पानी पहुंच गया। दो दिन पहले नगर पालिका ने जनरेटर चलवाकर वहां से पानी हटवाया था। लेकिन यह पानी केवल सड़क से ही हटा था। मोहल्ले में भरा हुआ है।
20 लाख खर्च के बाद भी भरा है पानी
विकास नगर मोहल्ले में जलनिकासी के लिए करीब 20 लाख की लागत से नाला बनवाया गया था। एक साल से अधिक का समय बीत गया है, अभी तक यह नाला शुरू नहीं हो सका है। कारण यह है गल्ला मंडी के पास जीटी रोड काटकर क्रास बनने की प्रक्रिया चल रही है। जबकि यह काम बरसात से पहले हो जाना चाहिए था।
लेकिन यहां के बाशिदें बरसात होते ही जलनिकासी से जूझते है। गल्ला मंडी से विकास नगर को जाने वाले मुख्य मार्ग पर कीचड़ भरा हुआ है। अधिकतर मोहल्ले के लोग इस सड़क के बजाए मोहल्ले की छोटी गलियों से होकर अपने घरों तक जाते है। यानी 20 लाख खर्च करने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए है।
नालों की सफाई में अतिक्रमण बड़ा रोड़ा
नगर पालिका का कहना है कि नालों की सफाई में अतिक्रमण बड़ा रोड़ा बना हुआ है। टीम नाला साफ करने जाती है पर अतिक्रमण की वजह से नाले की सफाई नहीं हो पाती है। अगर नाले से अतिक्रमण हटवाने का प्रयास किया जाता है तो तमाम तरह के विवाद उत्पन्न हो जाते है। अगर मशीन से 25 मीटर नाला साफ कर दिया गया।
उसके बाद अतिक्रमण के कारण मशीन नहीं पहुंच पाई तो कुछ दिन बाद 25 मीटर साफ नाले में भी मलबा पहुंच जाता है। इससे पूरी सफाई ही प्रभावित हो जाती है। नगर पालिका का कहना है जब तक अतिक्रमण नहीं हटवाया जाएगा। तब तक नालों की सही तरीके से सफाई नहीं हो सकेगी।
अगले बरस तक दूर होगी समस्या
नगर पालिका द्वारा नालों की सफाई करवाई गई थी। आवास विकास मोहल्ले की सबसे बड़ी समस्या सीवर लाइन को साफ करवाकर लोगों को राहत दी गई है। विकास नगर में नाला बन रहा है। अगले बरस तक शहर की जलनिकासी का संकट दूर करा दिया जाएगा।
- वैभव त्रिपाठी, ईओ