श्रावस्ती। तराई में छाई धुंध व कोहरा रविवार दूसरे दिन भी छटने का नाम नहीं ले रहा है। बूंद बनकर बरस रहे कोहरे के कारण वाहन चालकों को असुविधा हो रही है। कोहरा व पछुआ हवा के कारण बढ़ी ठिठुरन से लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। इससे बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं।
जिले में मौसम का पारा लगातार लुढ़क रहा है। रविवार को मौसम का पारा छह डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहा। करीब चार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही बर्फीली पश्चिमोत्तर हवा के कारण ठिठुरन बढ़ी है। बरसात बाद विगत दो दिनों से धूप न निकलने के कारण सिर्फ इंसान ही नहीं पशुओं को कंपकंपाते देखा जा रहा है। एक तरफ जहां घने कोहरे के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
पशुओं का विशेष ख्याल रखें पशुपालक
जिले में बरसात बाद कोहरा व ठंड काफी बढ़ गई है। इससे पालतू पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। रात में कोहरा बरसने के कारण नवजात बछड़े, बछियों, पडिय़ा व पड़वों में निमोनिया, स्वांस रोग, जीवाणु संक्रमण, अपचन की संभावना बढ़ी है। ऐसे में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जयइंद्र सिंह ने पशुपालकों से अपने मवेशियों को सर्दी से बचाने, उन्हें गुनगुना पानी पिलाने, पोषक तत्वों की कमी व दुग्ध उत्पादों में बढ़ोत्तरी के लिए गुड, खड़िया नमक नियमित रूप से खिलाने, अस्पतालों में मौजूद कैल्सियम मिनिरल मिश्रण, विटामिन युक्त खनिज मिक्चर पशुओं को देने तथा रात में उन्हें पशुशाला में बांधने, कंबल अथवा जूट का बोरा डालने की सलाह दी है।
मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. जेता सिंह ने जिलेवासियों अपील की है कि लोग कोयले की अंगीठी, चूल्हा, हीटर अथवा ब्लोवर इत्यादि का प्रयोग करते हैं तो सावधानी बरतें। अत्यधिक ठंड व कोहरा पड़ने पर छोटे बच्चों और बुजुर्गों को जितना हो सके उतना घर के अंदर रखें। सिगड़ी, अलाव व अंगीठी सोते समय बुझाकर सोएं।