श्रावस्ती। नेपाल से भारत में मावे की तस्करी हो रही है, इसकी सूचना मिली है। यह मावा नेपाल के सोनार क्षेत्र से आता है। इसकी कीमत भारतीय मावे से काफी कम है। बुधवार को इस सूचना के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार नेपाली मावे की तलाश कर रही है।
जानकारों के मुताबिक मंगलवार शाम नेपाल की ओर से एक पिकअप गाड़ी में भरकर मावा आया है, जो स्थानीय बाजार में खप गया। इसकी कीमत भारत में बिकने वाले मावे से लगभग आधी है। देखा जाए तो भिनगा व जमुनहा में स्थानीय स्तर पर तैयार मावा करीब 200 रुपये प्रति किलोग्राम में बिका, जबकि नेपाल से आने वाला मावा 100 से 120 की दर से बिक रहा है। नेपाल से मावा आने की सूचना के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग नेपाली मावे की तलाश में लग गया है। छोटे व्यापारियों द्वारा भी मावे की तस्करी काफी पहले से की जा रही है। बताया जा रहा है कि सोनार क्षेत्र मे कई भट्ठयिां मावा बनाने के लिए लगी है। यहां से पूरे वर्ष मावा तस्करी होकर भारत आता है। यहां से ये बहराइच मंडी तक जाता है। सामान्य दिनों में भी मावे की कीमत भारतीय बाजार की अपेक्षा कम रहती है।
नेपाल का सोनार क्षेत्र धीरे धीरे मावा तस्करी का गढ़ बनता चला जा रहा है। इस क्षेत्र से एजेंट भिनगा, जमुनहा बहराइच सहित अन्य बाजारों में जाते है। जहां मिठाई बनाने वालों से आर्डर लेकर उन्हें आपूर्ति करते हैं। इन एजेंटों के निशाने पर साप्ताहिक बाजार में लगने वाली दुकान होती है। जहां दुकानदार अपने घर से मिठाई बना कर लाते हैं। जिसे बेच कर चले जाते है। सोनार क्षेत्र की खासियत यह भी है कि मावे की मांग चाहे जितनी भी हो इसकी आपूर्ति तीन से चार घंटे के अंदर हो जाती है। मालूम रहे कि नेपाल क्षेत्र के सोनार में दुग्ध उत्पादन की स्थिति बहुत कम है। यहां से जितना मावा बाजार पहुंच रहा है। उतना दुग्ध उत्पादन नहीं है। ऐसे में स्थानीय लोगों को दावा है कि सोनार क्षेत्र सिंथेटिक मावा की मंडी है। इसीलिए भारतीय बाजार में इसकी कीमत लगभग आधा है। जिला अभिहित अधिकारी खाद्य सुरक्षा सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि जमुनहा क्षेत्र के खाद्य सुरक्षा अधिकारी को मावे पर निगाह रखने का निर्देश दिया गया है। फिलहाल अभी तक नेपाली मावे की बरामदगी नहीं हुई है।