श्रावस्ती। संयुक्त जिला चिकित्सालय में तीमारदारों को रात फर्श पर लेट कर बितानी पड़ती है। इन तीमारदारों के लिए पूरे कैंपस में शौचालय व स्नान के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं है जबकि कैंपस में दो रैन बसेरे बने हुए हैं। दोनों पर लोगों का कब्जा है।
नीति आयोग की मार्किंग में जिले की स्वास्थ्य सेवाएं सुधरी हैं। इसमें संस्थागत प्रसव व टीकाकरण का विशेष योगदान है। संस्थागत प्रसव के लिए अब ज्यादातर महिलाएं संयुक्त जिला चिकित्सालय पहुंच रही हैं लेकिन इन मरीजों के साथ आने वाले महिला व पुरुष तीमारदारों की स्थिति बहुत ही दयनीय हो जाती है। पूरे कैंपस में कहीं भी चालू सुलभ शौचालय न होने के कारण मरीजों के लिए बनाए गए शौचालय में जाना पड़ता है। यही नहीं दिन तो किसी तरह कट जाता है, लेकिन रात काटने के लिए इन तीमारदारों को समस्या का सामना करते हुए महिला प्रसव कक्ष व वार्ड के सामने बने बरामदे में रात गुजारनी पड़ती है। कुछ लोग स्टील की बेंच पर रात काटते हैं। यहां तक कि कुछ पुरुष तीमारदार महिला वार्ड के सामने ही गली में जमीन पर ही रात गुजारते हैं। ऐसा ही नजारा मंगलवार रात को संयुक्त जिला चिकित्सालय में देखने को मिला।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में वैसे तो दो रैन बसेरे हैं। एक रैन बसेरा पर एंबुलेंस के ड्राइवर व अन्य कर्मचारियों का कब्जा है। ऐसे में पुरुष दिन में यहां खाना खाने तो आ सकते हैं, लेकिन शौचालयों पर इन्हीं ड्राइवरों का कब्जा रहता है जिसमें ताला लगा रहता है। दूसरा रैन बसेरा काफी समय पहले बनकर तैयार हो गया था, लेकिन ताला लगा हुआ है। इसका उपयोग ही नहीं हुआ। यही नहीं महिला तीमारदारों के लिए इस पूरे कैंपस में कोई व्यवस्था नहीं है।
अस्पताल कैंपस में ही आश्रय गृह बना है। वह खुला भी रहता है। मरीजों के तीमारदारों को वहां जाने के लिए कहा जाता है, लेकिन तीमारदार मरीज के आसपास बने रहते हैं। कभी-कभी इन तीमारदारों की वजह से सफाई करना भी मुश्किल हो जाता है।
- डॉ. जेता सिंह सीएमएस