टीम के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आया था कि नकली दवा हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर में बनाई जा रही है। इस फैक्टरी का संचालन सुरेंद्र मलिक निवासी पंचकुला हरियाणा कर रहा था। नकली दवा की आपूर्ति दिल्ली-एनसीआर के जिलों में की जाती थी। टीम ने सुंदरनगर में पहुंच कर जांच की तो पता चला कि नकली दवा बनाने की फैक्टरी शामली के कैराना मार्ग स्थित इंडस्ट्रीयल एरिया में शिफ्ट हो गई है।
इसके बाद अपराध शाखा की टीम ने शामली पहुंच कर फैक्टरी पर छापा मारा था तो वहां फैक्टरी संचालित नहीं पाई गई, लेकिन वहां पर सुंदरनगर से लाई गई फैक्टरी की मशीनें, पार्टस और दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाला पाउडर व अन्य कच्चा माल बरामद हुआ था। अपराध शाखा की टीम फैक्टरी को सीज कर चली गई थी। अपराध शाखा की टीम ने न्यायालय से सीज की गई फैक्टरी को जिला औषधि प्रशासन को कार्रवाई के लिए हस्तांतरित करने की अनुमति ली।
न्यायालय का आदेश लेकर बृहस्पतिवार को अपराध शाखा दिल्ली के एसआई राजाराम, एएसआई राजेश कुमार व कांस्टेबल मनीष शामली पहुंचे और शामली जिले की औषधि निरीक्षक निधि पांडे से मिले। इसके बाद टीम और औषधि निरीक्षक कैराना मार्ग स्थित इंडस्ट्रीयल एरिया में ऐरटी मार्ग पर स्थित फैक्टरी पर पहुंची। टीम ने औषधि निरीक्षक को सीज की गई फैक्टरी में मौजूद मशीनें, पार्टस और नकली दवा बनाने में इस्तेमाल पाउडर समेत सभी सामान को हस्तांतरित कर दिया। औषधि विभाग की टीम ने मौके पर मिले पाउडर के चार नमूने लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा।
किराये पर दिया गया था फैक्टरी का भवन, नौकर के नाम किया था अनुबंध
दिल्ली अपराध शाखा के एसआई राजाराम ने बताया कि शामली इंडस्ट्रीयल एरिया में जिस भवन में फैक्टरी संचालित करने की तैयारी थी, उसकी मालिक राधा निवासी कंडेला है। पिछले महीने फरवरी में ही सुरेंद्र मलिक ने इस भवन को साढ़े 28 हजार रुपये प्रति माह किराये पर लिया था। इसका अनुबंध सुरेंद्र ने अपने नौकर सुमित निवासी गांव डरोली चंदौसी जिला मुरादाबाद के नाम से किया था। मौके पर मौजूद सुमित ने बताया कि वह कई साल से हिमाचल मे सुरेंद्र की फैक्टरी में करीब 13 हजार रुपये महीना की नौकरी करता था। उसका फैक्टरी में साफ-सफाई करने का कार्य करता था। सुरेंद्र ने उसे बताया था कि अब फैक्टरी शामली में चलाने की बात कहकर उससे कुछ कागज पर हस्ताक्षर कराए थे। उसे नहीं पता था कि अनुबंध उसके नाम से किया गया है।
दिल्ली में इनकी हुई थी गिरफ्तारी
अपराध शाखा के एसआई राजाराम ने बताया कि सात मार्च को दिल्ली में विकास चौहान निवासी मंडोला दिल्ली, सुरेंद्र मलिक निवासी पंचकुला हरियाणा, परवेज खान निवासी नोर्थ गोंडा दिल्ली, उपकार सिंह उर्फ मनी निवासी गीता कॉलोनी दिल्ली, जसदीप सिंह निवासी झील खुरेजा दिल्ली, अब्दुल बासित निवासी ओल्ड गोविंदपुरा दिल्ली, डेनियल अली वेलकम सलेमपुर दिल्ली, मुकेश कुमार निवासी उत्तमनगर नई दिल्ली, अनिल कुमार निवासी समालखा हरियाणा और चंद्रपाल सिंह निवासी मंडोली दिल्ली को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने बताया कि इस मामले में शामली के कस्बा कैराना के मोहल्ला खैल खुर्द निवासी नवाजिश फरार है।
नकली दवा बनाने के पाउडर के लिए चार नमूने
जिला औषधि निरीक्षक निधि पांडे ने बताया कि दिल्ली की अपराध शाखा की टीम ने फैक्टरी को पूर्व में सीज किया था। औषधि विभाग को कार्रवार्ठ के लिए फैक्टरी हस्तांतरित की गई है। फैक्टरी में करीब 33 लाख रुपये की कीमत की मशीनें, पार्टस व पाउडर आदि कच्चा माल मिला है। फैक्टरी चलती हुई नहीं मिली और न ही यहां से कोई दवा बरामद हुई है। जांच में सिर्फ यह सामने आया है कि यहां पर फैक्टरी चलाने की तैयारी थी। पिछले महीने ही भवन को किराये पर लिया गया था। मौके पर पाउडर मिला है, उस पर कोई नाम नहीं लिखा है। इसके चार नमूने लिए गए हैं। नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। औषधि विभाग की कार्रवाई पूरी होने के बाद अपराध शाखा की टीम ही फैक्टरी को सीज करेगी।
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