शाहजहांपुर। शासन ने भले ही चीनी मिलों को 14 दिन के अंदर गन्ना मूल्य भुगतान करने के आदेश दिए हों, जिले की चीनी मिलों के अधिकारी बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। पेराई सत्र 2021-22 खत्म हुए तीन माह बीत रहे हैं लेकिन बिरला ग्रुप की रोजा मिल और डालमिया ग्रुप की निगोही मिल को छोड़कर शेष तीनों चीनी मिलें अभी तक किसानों के गन्ना बकाया मद में दो अरब 12 करोड़ 78 लाख रुपये दबाए बैठी हैं।
सिर्फ बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल पर किसानों की 1.34 अरब रुपये से अधिक की देनदारी शेष है। सहकारी क्षेत्र की तिलहर व पुवायां मिलें अभी तक किसानों के 78 करोड़ रुपये चुकता नहीं कर सकी हैं। इससे किसान खासे परेशान हैं और उन्हें अगली फसलों की तैयारी के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। बीते सप्ताह डीएम उमेश प्रताप सिंह ने चीनी मिलों से गन्ना के बकाया भुगतान की समीक्षा की थी। तब तक रोजा व निगोही मिलें किसानों को संपूर्ण भुगतान कर चुकी थीं। समीक्षा से पता चला कि जनपद में सभी चीनी मिलों ने पेराई सत्र 2021-22 के कुल गन्ना मूल्य का 80.74 प्रतिशत भुगतान कर दिया है, लेकिन मकसूदापुर मिल पर किसानों की बड़ी रकम बकाया देख डीएम ने बैठक में मौजूद मिल के प्रतिनिधि अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई और अतिशीघ्र गन्ना भुगतान करने के निर्देश दिए। मिल के इकाई प्रमुख आरबी खोखर ने रोजाना एक से दो करोड़ रुपये तक किसानों के खाते में भिजवाने का वायदा किया, लेकिन उसे पूरा नहीं किया। तब से यह मिल किसानों को सिर्फ 2.16 करोड़ रुपये दे सकी है, लेकिन उस पर अभी किसानों का 134.61 करोड़ रुपये बकाया है।
इसी तरह तिलहर मिल ने 66.48 करोड़ रुपये किसानो के खाते में भेजकर 60 फीसदी देनदारी चुकता कर दी लेकिन उस पर गन्ना का 44.32 करोड़ रुपये बकाया है। पुवायां सहकारी मिल ने किसानों को 55.22 करोड़ रुपये देकर 62 फीसदी भुगतान कर दिया लेकिन उस पर 33.85 करोड़ रूपये बकाया है। इन मिलों के प्रबंधक किसानों का कर्ज चुकाने के लिए शासन से वित्तीय पैकेज मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
किसानों की बात
खुटार के किसान श्याममोहन ने बताया कि बजाज चीनी मिल का भुगतान काफी पिछड़ा चल रहा है, इससे किसानों को बड़ी परेशानी होती है। धान की रोपाई करनी है लेकिन रुपयों का अभाव है। अन्य चीनी मिलें समय से भुगतान करती हैं तो बजाज चीनी मिल क्यों नहीं कर पाती? अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। पुवायां के रामलाल ने कहा कि किसान सहकारी चीनी मिल पुवायां का भुगतान भी काफी लेट चल रहा है। इससे किसान परेशान हैं। गन्ने की खरीद नकद भुगतान पर करने की व्यवस्था करनी चाहिए। रुद्रपुर गांव के प्रधान अनिल वर्मा ने बताया कि चीनी मिल से गन्ना भुगतान नहीं मिलने से नई फसल के तहत गन्ना की पौध लगाने और धान की रोपाई में भारी परेशानी हो रही है। मिल ने फरवरी तक का भुगतान किया है। उसके बाद से मेरा डेढ़ लाख रुपये का भुगतान अभी तक बाकी है। जोधपुर नवदिया, तिलहर के अनिरुद्ध यादव ने बताया कि तिलहर चीनी मिल गन्ने का भुगतान नहीं कर पा रही है। किसानों की बड़ी धनराशि मिल पर बकाया है। गन्ने की फसल और धान की रोपाई के लिए पैसों की आवश्यकता है, लेकिन जेब खाली है। मेरे जैसे तमाम किसान अपना सामान गिरवी रखकर किसी तरह खेती के काम चला रहे हैं।
बजाज मिल को डीएम के स्तर से रिकवरी का नोटिस जारी होने के बाद भी बकाया भुगतान में तेजी नहीं आ सकी। मिल ने एक सप्ताह के दौरान सिर्फ 2.16 करोड़ रुपये भुगतान किया है। मिल अधिकारियों ने ग्रुप की अन्य मिलों से वित्तीय सहायता लेकर किसानों को भुगतान कराने की बात कही है। ऐसा नहीं होने पर डीएम के निर्देश पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। - डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी