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बदहाल हुआ गर्रा निरे स्थित गांधी पार्क, नशेड़ियों ने बनाया ठिकाना

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शाहजहांपुर के गर्रा घाट पर स्थित गांधी पार्क में टूटी पड़ी बेंच - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। शहर में पार्कों के सौंदर्यीकरण का काम करवाया जा रहा है, लेकिन उनकी देखरेख पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। इसकी बानगी गर्रा घाट पर स्थित गांधी पार्क में देख सकते हैं। गर्रा घाट के साथ ही बगल में बना गांधी पार्क बदहाल स्थिति में है।
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गर्रा घाट पर स्थित गांधी पार्क में बैठने की बेंच टूटी पड़ीं हैं तो झूले गायब हैं। सफाई न होने के चलते गांधीजी की प्रतिमा सफेद से मटमैली हो चुुकी है। पौधों के नाम पर गांधी प्रतिमा के सामने झाड़ियां खड़ी हैं। इसकी कटाई-छंटाई तक नहीं होती है। बच्चों के खेलने और बड़े-बुजुर्गों के बैठने के लिए बने पार्क को नशेड़ियों व सटोरियों ने अपना ठिकाना बना रखा है। इसकी हकीकत पार्क में पड़ी शराब की बोतलें और धुत पड़े नशेड़ी बयां कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि पार्क की देखरेख पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मंदिर से लगा होने के बावजूद पार्क में नशेड़ी आते हैं और दिनभर यहीं पड़े रहते है।
40.79 लाख रुपये की लागत से हुआ था सौंदर्यीकरण का काम
गांधी पार्क के सौंदर्यीकरण का कार्य अमृत योजना में वर्ष 2016-2017 के तहत करवाया गया था। इसकी शुरुआत 21 अप्रैल, 2018 को हुई और 21 अक्तूबर 2018 को काम पूरा हुआ। तब 1290 स्क्वायर मीटर के इस पार्क की बाउंड्रीवॉल पर प्लास्टर और पेंटिंग हुई थी। पाथवे का निर्माण करवाया गया। बच्चों के लिए झूले लगे। एलईडी लाइट लगवाई गईं। महात्मा गांधी की प्रतिमा का सौंदर्यीकरण हुआ। पार्क में आने वाले लोगों के बैठने को आठ बेंच डलवाई थीं और अन्य काम भी करवाया गया था। इसमें 40.79 लाख रुपये की लागत आई थी।
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देखरेख पर नहीं ध्यान
गांधी पार्क में बैठने की बेंच टूटी हुई है। बच्चों के जो झूले लगे थे, वे गायब हो चुके हैं। पार्क में नशेड़ियों, स्मैकियों का जमावड़ा रहता है। उन्हें कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है। पार्क की देखरेख पर ध्यान दिया जाना चाहिए। - संजीव
बच्चों के झूले गायब
पार्क के पास में ही मंदिर भी है। श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन पार्क में लगे झूले टूट गए हैं, जोकि स्टोर में पड़े हैं। झाड़ू लगाने के अलावा पार्क में किसी तरह की मेंटीनेंस पर ध्यान नहीं दिया जाता है। - श्वेत रस्तोगी
नशेड़ियों का कब्जा
बच्चों के खेलने और लोगों के प्राकृतिक वातावरण में बैठने के लिए पार्क होते हैं। जब पार्क के सौंदर्यीकरण का काम हुआ था, तो बहुत अच्छा लगता था। लेकिन अब नशेड़ियों व स्मैकियों का कब्जा है। - राहुल कुमार
टूटी बेंच पर बैठना पड़ा
मंदिर पर धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने आया, तो सोचा कुछ देर पार्क में ही बैठ लिया जाए। पार्क के नाम गेट पर लिख दिया है और कुछ भी नहीं है। टूटी बेंच पर बैठना पड़ रहा है। पार्क में देखरेख की कमी साफ दिख रही है। - गोविंद

शाहजहांपुर के गर्रा घाट पर स्थित गांधी पार्क से झूला गायब होने पर जमीन में गढ़ा स्टैंड व दूसरे का ?- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

शाहजहांपुर के गर्रा घाट पर स्थित गांधी पार्क में सफाई न होने से मटमैली हुई महात्मा गांधी की प्रति- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

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