कोलाघाट स्थित रामगंगा नदी किनारे शवों का अंतिम संस्कार किया गया। संवाद
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शाहजहांपुर। हापुड़ की फैक्टरी में हुए हादसे के बाद कांट ब्लॉक के भंडेरी गांव के आठ लोगों के शव रविवार रात 12 बजे के बाद यहां लाए गए। अपनों के शवों को देखकर गांव में चीत्कार मच गया। परिजन की चीखें सुनकर सभी का कलेजा कांप उठा। रामगंगा नदी किनारे कोलाघाट के पास सभी शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
चार जून को हापुड़ की पटाखा फैक्टरी में विस्फोट में भंडेरी गांव के सर्वेश पुत्र पप्पू, अनिल उर्फ छोटे पुत्र रामचंद्र, भूरे पुत्र रामबक्श, रामू पुत्र दर्शन, अनूप पुत्र राजेश, प्रेमपाल पुत्र रामसरन, इरफान पुत्र इब्बन, छविराम पुत्र कल्लू, नूर हसन पुत्र इंसान और राघवेंद्र पुत्र रामनरेश की मृत्यु हो गई थी। बमुश्किल परिजन ने शवों की शिनाख्त की थी। हापुड़ में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिए गए। इरफान और नूरहसन के परिजन ने हापुड़ में ही दोनों के शव दफना दिए। रविवार रात 12 बजे के बाद एंबुलेंस और किराये के वाहन से शेष आठ शव भंडेरी गांव लाए गए।
शव गांव पहुंचते ही परिजन बिलख पड़े। गांव में पहुंचे डीएम उमेश प्रताप सिंह और एसपी एस. आनंद ने शोकसंतप्त ग्रामीणों से बातचीत की और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। ददरौल क्षेत्र के भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह भी गांव पहुंचे। विधायक के खिलाफ ग्रामीणों में गुस्सा दिखाई दिया। विधायक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनके स्तर से हर संभव मदद की जाएगी। ग्रामीण मृतक के परिजन को दो-दो लाख रुपये मुआवजा से संतुष्ट नहीं दिखे। इसके बाद कोलाघाट पर शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।