फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Exclusive: दृष्टिबाधित राधेश्याम के अब बहुरेंगे दिन, डीएम ने बढ़ाया मदद के लिए हाथ

Sun, 19 Sep 2021 03:22 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर।

सार

डीएम की पहल पर पहुंची टीम ने दोनों बेटों का स्पांसरशिप के लिए फार्म भरवाया। दो बेटों की पढ़ाई के लिए सरकारी मदद मिलेगी। पिता दोनों आंख से दृष्टिबाधित और मां की दो साल पहले मौत हो गई थी।

 
विज्ञापन
डीएम दिव्या मित्तल। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संतकबीरनगर शहर के मटिहना मोहल्ले में गरीबी और लाचारगी भरी जिंदगी गुजार रहे एक परिवार को डीएम की पहल पर आगे बढ़ने का रास्ता नजर आया है। सरकारी महकमे की ओर से उसकी खोज-खबर लेने से दोनों आंखों से दृष्टिबाधित राधेश्याम की चिंता अब काफी हद तक कम हो गई है।

विज्ञापन


परिवार का मुखिया होने के नाते राधेश्याम दोनों आंख से दृष्टिबाधित होने से मजदूरी करने में अक्षम हैं। छह माह पूर्व इस परिवार के दो बच्चे सड़क पर बिछाए गए तारकोल से जल गए थे और उनका ठीक ढंग से उपचार नहीं हो पा रहा है। दोनों बेटों की पढ़ाई बाधित हो रही है। चिंतित और परेशान राधेश्याम ने एक सप्ताह पहले डीएम दिव्या मित्तल के समक्ष उपस्थित होकर अपनी लाचारी और गरीबी बताई थी। इस पर डीएम ने उसे आश्वस्त किया था कि उसकी पूरी मदद की जाएगी। शनिवार को मौके पर टीम को पड़ताल के लिए भेजा गया। टीम ने परिवार के हालात के बारे में जानकारी जुटाई और परिवार के दोनों बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए स्पांसर शिप का फार्म भरवाया। इससे बच्चों को अब बेहतर शिक्षा मिल सकेगी।

शहर के मटिहना मोहल्ले में 40 वर्षीय राधेश्याम का परिवार रहता है। राधेश्याम दोनों आंख से दृष्टिबाधित हैं। दो साल पहले उनकी दिव्यांग पत्नी फूला देेवी की डिलीवरी के दौरान मौत हो गई थी। उसके बाद परिवार पर संकट और बढ़ गया। लाचार होने की वजह से राधेश्याम मेहनत-मजदूरी भी करने में सक्षम नहीं हैं। उनके पास दो बेटे और एक मासूम बेटी है। बच्चों की परवरिश और उनकी शिक्षा का प्रबंध करने में कठिनाई आ रही है।
विज्ञापन


 

विज्ञापन

इस परिवार के बारे में डीएम दिव्या मित्तल को जानकारी मिलने पर उन्होंने जिला अधिकारी डॉक्टर श्वेता त्रिपाठी और जिला दिव्यांगजन अधिकारी प्रियंका यादव को मौके पर भेजा। दोनों अधिकारियों ने राधेश्याम के घर पहुंच कर जानकारी जुटाई। जिला अधिकारी डॉक्टर श्वेता ने बताया कि परिवार के पास टूटा-फूटा घर है। घर के चारों तरफ जलभराव है। उसके पास नौ वर्षीय बेटा राजेश्वर, सात वर्षीय गौरव और दो साल की एक नन्ही बेटी है।

पूछताछ में पता चला कि छह महीने पहले दोनों बेटे ननिहाल गए थे, जहां सड़क बन रही थी। सड़क पर डाले गए तारकोल से दोनों बच्चों का पैर बुरी तरह झुलस गया। गरीबी की वजह से दोनों बच्चों का न ठीक प्रकार से उपचार हो सका और न ही ठीक से शिक्षा मिल पा रही है। बच्चों की शिक्षा के लिए स्पांसर शिप का फार्म भरवाया गया। इस योजना के तहत प्रत्येक बच्चे को हर महीने दो हजार रुपये की मदद मिलेगी। वहीं इससे उनकी शिक्षा में कोई रुकावट भी नहीं होगी।

वहीं जिला दिव्यांगजन अधिकारी प्रियंका ने बताया कि राधेश्याम को दिव्यांगजन पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है। मटिहना वार्ड के सभासद शैलेश कुमार गौतम ने बताया कि दिव्यांग राधेश्याम का परिवार बेहद गरीब है। इसके पास राशन कार्ड की सुविधा है। इसके अलावा उन्हें पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है। खेत नहीं है। गरीबी की वजह से बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही थी, लेकिन डीएम की पहल से उम्मीद है कि बच्चों को स्पांसर शिप का लाभ मिलेगा। बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया जाएगा।

डीएम दिव्या मित्तल ने कहा कि मटिहना वार्ड के रहने वाले दृष्टिबाधित राधेश्याम के परिवार के बारे में जैसे ही जानकारी मिली, जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉक्टर श्वेता, दिव्यांगजन अधिकारी प्रियंका और कर्मचारी आकाश, शुुभग और नरायन को मौके पर भेजा गया। गरीब परिवार के दोनों बच्चों की शिक्षा के लिए स्पांसर शिप के तहत प्रत्येक महीने दो-दो हजार रुपये का लाभ दिलाया जाएगा। जिससे दोनों बच्चों को उचित ढंग से शिक्षा मिल सके। इसके अलावा जो भी पात्रता के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है, दिलाया जाएगा।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें