इस परिवार के बारे में डीएम दिव्या मित्तल को जानकारी मिलने पर उन्होंने जिला अधिकारी डॉक्टर श्वेता त्रिपाठी और जिला दिव्यांगजन अधिकारी प्रियंका यादव को मौके पर भेजा। दोनों अधिकारियों ने राधेश्याम के घर पहुंच कर जानकारी जुटाई। जिला अधिकारी डॉक्टर श्वेता ने बताया कि परिवार के पास टूटा-फूटा घर है। घर के चारों तरफ जलभराव है। उसके पास नौ वर्षीय बेटा राजेश्वर, सात वर्षीय गौरव और दो साल की एक नन्ही बेटी है।
पूछताछ में पता चला कि छह महीने पहले दोनों बेटे ननिहाल गए थे, जहां सड़क बन रही थी। सड़क पर डाले गए तारकोल से दोनों बच्चों का पैर बुरी तरह झुलस गया। गरीबी की वजह से दोनों बच्चों का न ठीक प्रकार से उपचार हो सका और न ही ठीक से शिक्षा मिल पा रही है। बच्चों की शिक्षा के लिए स्पांसर शिप का फार्म भरवाया गया। इस योजना के तहत प्रत्येक बच्चे को हर महीने दो हजार रुपये की मदद मिलेगी। वहीं इससे उनकी शिक्षा में कोई रुकावट भी नहीं होगी।
वहीं जिला दिव्यांगजन अधिकारी प्रियंका ने बताया कि राधेश्याम को दिव्यांगजन पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है। मटिहना वार्ड के सभासद शैलेश कुमार गौतम ने बताया कि दिव्यांग राधेश्याम का परिवार बेहद गरीब है। इसके पास राशन कार्ड की सुविधा है। इसके अलावा उन्हें पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है। खेत नहीं है। गरीबी की वजह से बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही थी, लेकिन डीएम की पहल से उम्मीद है कि बच्चों को स्पांसर शिप का लाभ मिलेगा। बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया जाएगा।
डीएम दिव्या मित्तल ने कहा कि मटिहना वार्ड के रहने वाले दृष्टिबाधित राधेश्याम के परिवार के बारे में जैसे ही जानकारी मिली, जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉक्टर श्वेता, दिव्यांगजन अधिकारी प्रियंका और कर्मचारी आकाश, शुुभग और नरायन को मौके पर भेजा गया। गरीब परिवार के दोनों बच्चों की शिक्षा के लिए स्पांसर शिप के तहत प्रत्येक महीने दो-दो हजार रुपये का लाभ दिलाया जाएगा। जिससे दोनों बच्चों को उचित ढंग से शिक्षा मिल सके। इसके अलावा जो भी पात्रता के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है, दिलाया जाएगा।