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बारिश से 1100 एकड़ फसल जलमग्न

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बाढ से धान की फसल हुई जलमग्न।संवाद - फोटो : KHALILABAD
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बारिश से 1100 एकड़ फसल जलमग्न
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धनघटा और मेंहदावल क्षेत्र में धान की खेतों में भरा है पानी, किसानों ने मांगा मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। लगातार बारिश के चलते जिले में धान की फसलें जलमग्न हो गई हैं। धनघटा, मेंहदावल तहसील क्षेत्र में करीब 1100 एकड़ फसल पूरी तरह से पानी में डूबी हुई है। इसको लेकर किसानों में माथे पर चिंता की लकीरें हैं। किसानों ने प्रशासन से फसलों का आकलन कराकर मुआवजे की मांग की है।
मेंहदावल प्रतिनिधि के अनुसार लगातार बारिश से क्षेत्र में 300 एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। ऐसे में किसान परेशान हैं। क्षेत्र के नहुनी, गुरची, घूरापाली, बाडो, मेहावर, हरपुर, पचनेउरी, मलाई, बौधरा, गगनईराव, धौरापार आदि क्षेत्रों में धान की फसल पूरी तरह से डूब गई हैं। किसान गुनई गुप्ता, जगदंबा तिवारी, मकसूदन तिवारी, आलोक सिंह, दशरथ निषाद, पियारे निषाद, अदालत सिंह, जीत बहादुर, शिवदास कन्नौजिया, भकोले गौतम, सूरत निषाद, कल्लू सिंह, रामजी सिंह, राम मूरत यादव, जोखन निषाद, रमेश निषाद आदि ने कहा कि पिछले वर्ष दूसरी सूची में फसल बर्बाद होने वाले किसानों को आज तक मुआवजे की रकम नहीं मिली। वहीं, इस बार भी फसल पूरी तरह से पानी में डूब गई है। मेंहदावल प्रधान संघ के ब्लॉक अध्यक्ष दीप नरायन शर्मा ने कहा कि जिला व तहसील प्रशासन को डूबी हुए फसलों की पड़ताल कराते हुए क्षेत्र को जलमग्न घोषित कर किसानों को अहेतुक सहायता दिलाने की दिशा में पहल करनी चाहिए। किसान फसल बर्बादी को लेकर पीड़ित व परेशान हैं।
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धनघटा प्रतिनिधि के अनुसार घाघरा नदी की बाढ़ और कटान से एमबीडी बांध के दक्षिण बसे 38 गांवों के किसानों की 10 किलो मीटर की परिधि में करीब आठ सौ एकड़ फसल बर्बाद हो गई। जिन खेतों में फसल लहलहा रही थी वहां अब नाव चल रही है। बाढ़ के दंश को झेल रहे गांव के लोग फसलों का मुआवजा देने की गुहार की है। धनघटा-बिड़हर घाट मार्ग से लगायत गोरखपुर जिले की सीमा सरैया गांव तक बाढ़ का पानी एमबीडी बांध तक भरा हुआ है। इससे तुकर्वलिया नायक, जगदीशपुर, दौलतपुर, सियर कला, पटौवा, आगापुर, चपरापूर्वी, दौलतपुर, रामपुर, औराडाड़, तिलहा, गायघाट दक्षिणी समेत 38 गांव के किसानों की हजारों एकड़ फसल नदी कटान और बाढ़ से बर्बाद हो गई। किसान रामललित का कहना है कि दो माह से नदी की कटान और बाढ़ तबाही मचाई हुई है। सैकड़ों किसानो की खेती नदी की धारा में विलीन हो चुकी है। किसान रामदेव का कहना है कि घाघरा नदी ने इस वर्ष कटान करके किसानों को उजाड़ दिया है। राममिलन का कहना है कि किसानों की बर्बादी किसी से छिपी नहीं है। दो माह से यहां के लोग जो तबाही झेल रहे, उसे जीवन भर भूल नहीं पाएंगे। तहसीलदार रत्नेश तिवारी का कहना है कि घाघरा नदी की बाढ़ से कितनी फसल का नुकसान हुआ है। इसका आकलन किया जा रहा है। जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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