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सीएचसी पर बिना देखरेख के कबाड़ हो गई अल्ट्रासाउंड मशीन

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देवबंद (सहारनपुर)। सीएचसी देवबंद पर गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। करीब 15 वर्ष पहले जन सुविधा के लिए खरीदी गई अल्ट्रासाइंड मशीन को रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने की वजह से ताले में बंद कर रख दिया गया था। विभागीय अनदेखी के कारण मशीन सालों तक धूल फांकती रही, जिसे अब कंडम घोषित कर दिया गया है।
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करीब 15 वर्ष पहले सीएचसी देवबंद में करीब ढाई लाख रुपये कीमत की मशीन खरीदी गई थी। शुरू में यहां तैनात रहे रेडियोलोजिस्ट डॉ. वाईडी शर्मा ने इसे कुछ दिन चलाया, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद मशीन को कमरे में ताला बंद कर रख दिया गया। तब से मशीन कमरे में बंद रखी रही। समय-समय पर नगर के समाजसेवी संगठनों द्वारा स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर सीएचसी पर रेडियोलॉजिस्ट की मांग की गई, लेकिन मांग अनसुनी कर दी गई। हाल ही में अधिवक्ता मनोज सिंघल ने एसडीएम दीपक कुमार से मिलकर अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती कराने की मांग रखी थी। एसडीएम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय कुमार त्यागी से जानकारी ली, जब मशीन को देखा गया तो पता चला कि वह इस्तेमाल नहीं करने और धूल चढ़ने की वजह से खराब हो गई है।
हर माह 200 लोग बाहर कराते हैं जांच
सीएचसी पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। जिनमें से करीब पांच से दस मरीजों को चिकित्सकों द्वारा अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी जाती है। इनमें ज्यादातर गर्भवती महिलाएं होती हैं। इस प्रकार हर सप्ताह करीब 50 मरीज और हर माह करीब 200 मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए प्राइवेट डॉक्टरों के यहां जाना पड़ता है।
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अन्य जगह शिफ्ट हो सकती थी मशीन
यदि मशीन चलाने के लिए कोई रेडियोलॉजिस्ट नहीं था तो विभाग मशीन को किसी जरूरत वाली जगह पर शिफ्ट कर सकता था, जिससे लोग इसका लाभ उठा सकें। विभागीय नियम भी यही है, लेकिन विभाग की ओर से न तो यहां कोई रेडियोलॉजिस्ट तैनात किया गया न ही मशीन का किसी अन्य जगह पर उपयोग किया गया।
सीएचसी में रखी अल्ट्रासाउंड मशीन को देखा गया है, जो अब काम नहीं कर रही है। इसकी रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जा चुकी है। विभाग से नई मशीन के साथ ही रेडियोलॉजिस्ट की मांग की गई है, जिससे मरीजों को सुविधा मिल सके।
डॉ. अजय कुमार त्यागी, प्रभारी, सीएचसी देवबंद।
ठीक हुई थायराइड जांच मशीन
एसबीडी जिला अस्पताल में करीब दो करोड़ रुपये की कीमत की थायराइड जांच मशीन बीते करीब चार माह से खराब थी। मशीन को ठीक करने का ठेका प्रदेश स्तर से एक निजी कंपनी को दिया गया है। मशीन के लिए पुर्जा अमेरिका से मंगाया गया था, जिसे आने में करीब चार माह लग गए। लैब टेक्नीशियन जेपी चाहर ने बताया कि कंपनी ने पुर्जा डालकर मशीन को चालू कर दिया है। अब जांच हो रही है।
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