संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। गन्ना विभाग समय पर गन्ना मूल्य भुगतान कराने में विफल साबित हो रहा है। होली के त्योहार पर भी भुगतान में तेजी नहीं आयी है। इसके चलते जनपद की देवबंद चीनी मिल को छोड़कर अन्य पांच चीनी मिलों पर किसानों के 447 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य के बकाया हैं। बकाया भुगतान नहीं होने से किसान के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
सरकार और गन्ना विभाग के तमाम प्रयास किसानों को समय पर गन्ना मूल्य दिलाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। जनपद की छह चीनी मिलों ने अब तक 1247.50 करोड़ रुपये के गन्ने की खरीदारी की है। इसमें 1088.89 करोड़ रुपये 14 दिनों के निर्धारित दायरे में आए हैं। चीनी मिलों ने अब तक खरीदे गए गन्ने का मात्र 58.92 प्रतिशत का ही भुगतान किया है। इसके चलते शुगर मिलों पर जिले के किसानों के 447.33 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य अवशेष हैं। जनपद में देवबंद चीनी मिल ही समय पर गन्ना मूल्य भुगतान कर रही है। गांगनौली शुगर मिल भुगतान में सबसे फिसड्डी साबित हो रही है। गन्ना खरीद अधिनियम के तहत गन्ना मिल में सप्लाई होने के 14 दिनों के अंदर उसका भुगतान किसान को हो जाना चाहिए। इसके बाद भुगतान कराने पर बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज देने का प्रावधान है, लेकिन किसानों को न तो समय पर भुगतान ही हो रहा है और न ही बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज ही मिल रहा है।
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--- वर्जन ---
जनपद में देवबंद चीनी मिल का गन्ना मूल्य भुगतान समय पर चल रहा है, जबकि अन्य पांच चीनी मिलों पर 447.33 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य अवशेष हैं। इनमें सबसे अधिक बकाया गांगनौली स्थित बजाज शुगर मिल पर हैं। इस पर 229.30 करोड़ रुपये बकाया हैं। भुगतान में कोताही बरतने वाली मिलों पर जल्द भुगतान करने के लिए दबाव बनाया गया है। --- कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी, जिला गन्ना अधिकारी।
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-- एक नजर में बकाया गन्ना मूल्य --
मिल बकाया
गांगनौली 229.30 करोड़ रुपये
शेरमऊ 40.06 करोड़ रुपये
गागलहेडी 68.41 करोड़ रुपये
नानौता 76.19 करोड़ रुपये
सरसावा 45.85 करोड़ रुपये
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नोट: गन्ना विभाग के 16 मार्च के आंकड़ों के अनुसार।