सहारनपुर। कक्षा एक से पांच तक के विद्यालय खुल चुके हैं। अभी बहुत कम संख्या में बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन ऐसे परिवारों के सामने दुविधा पैदा हो गई है, जिनके परिवार के दो बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते हैं, लेकिन दोनों को अलग अलग शिफ्ट में स्कूल भेजना और फिर लाना पड़ रहा है। ऐसे अभिभावकों द्वारा विद्यालय प्रबंधन से मांग की जा रही है कि दोनों बच्चों को एक ही शिफ्ट में बुलाया जाए या फिर ऑनलाइन ही पढ़ाया जाए।
दरअसल, शासन ने कक्षा एक से पांच तक के विद्यालय खोलने के साथ ही गाइडलाइन भी जारी की है, जिसके चलते 50 प्रतिशत ही बच्चों को एक शिफ्ट में स्कूल बुलाया जा सकता है। विद्यालयों की तरफ से भी यह व्यवस्था बना दी गई है, लेकिन उससे अनेक अभिभावकों की मुश्किल बढ़ गई है। क्योंकि पहली शिफ्ट सुबह आठ से साढ़े दस बजे तक है और दूसरी 11 बजे से डेढ़ बजे तक है। कुल ढाई घंटे की पढ़ाई के लिए बच्चों को स्कूल बुलाया जा रहा है, लेकिन जिस परिवार में दो बच्चे एक ही विद्यालय में पढ़ रहे हैं, उनके दोनों बच्चों को अलग अलग शिफ्ट में कर देने से एक बच्चे को सुबह आठ बजे तक स्कूल छोड़ना पड़ता है और फिर साढ़े दस बजे लाना होता है। इसी तरह दूसरी शिफ्ट वाले बच्चे के 11 बजे स्कूल पहुंचाना और फिर डेढ़ बजे तक लाना होता है। ऐसे में जो व्यापारी अथवा नौकरी पेशा हैं, उनके लिए समय का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया है।
स्कूल वैन भी तो नहीं चल रहीं
चूंकि बच्चों को कम संख्या में बुलाया जा रहा है और बच्चों को स्कूल भेजने की बाध्यता भी नहीं है, इस कारण स्कूल वाहनों का भी संचालन नहीं हो पा रहा है। यह भी अभिभावकों की परेशानी है, क्योंकि अधिकांश अभिभावकों को अपने बच्चे खुद ही स्कूल छोड़ने और लाने पड़ रहे हैं।
अपने पुराने दोस्तों को याद कर रहे बच्चे
नवीननगर निवासी देवांश और गलीरा रोड निवासी भव्य सेंट मैरी एकेडमी में बीते वर्ष एक ही कक्षा में थे। दोनों में दोस्ती थी। ऑनलाइन भी संपर्क में थे, लेकिन जैसे ही स्कूल खुले तो दोनों को अलग-अलग शिफ्ट में कर दिया गया। अब ऐसे छात्र अपने अभिभावकों से कह रहे हैं कि जिस शिफ्ट में मेरा दोस्त आता है, उसी शिफ्ट में मुझे भी कराओ।
अभिभावकों की पीड़ा
अभिभावक गौरव गाबा, सचिन मलिक, अनिल रसवंत और संयम सेठी का कहना है कि विद्यालय संचालकों को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि एक परिवार के यदि दो बच्चों का दाखिला है तो उन दोनों को एक ही शिफ्ट में बुलाया जाए। वैसे भी अभी बच्चों को स्कूल भेजने में डर लग रहा है, इसलिए ऑनलाइन पढ़ाई ही जारी रहनी चाहिए। उनका कहना है कि अनेक स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई बंद कर दी है, जो शासन की गाइडलाइन का उल्लंघन है।
गौरव गाबा- फोटो : SAHARANPUR
अनिल रसवंत- फोटो : SAHARANPUR
सचिन मलिक- फोटो : SAHARANPUR