चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक को धूप में बैठाकर वार्ता करते किसान
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सरसावा (सहारनपुर)। सहकारी चीनी मिल द्वारा एक विशेष प्रजाति का गन्ना अस्वीकृत करने के विरोध में भाकियू भानु के जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में किसानों ने प्रदर्शन करते हुए मिल प्रबंधक को धूप में बैठा लिया। काफी जद्दोजहद के उपरांत मिल प्रबंधन मात्र वर्तमान पेराई सत्र के लिए अस्वीकृत प्रजाति का गन्ना लेने के लिए तैयार हुआ।
सोमवार को सरसावा स्थित चीनी मिल के मुख्य कार्यालय पहुंचे भानु गुट के किसानों ने प्रधान प्रबंधक का घेराव करते हुए उन्हें प्रांगण में अपने साथ धूप में बैठा लिया। इस दौरान जिलाध्यक्ष विजयंत राणा ने कहा कि मिल प्रबंधन गन्ने की 5125 प्रजाति को अस्वीकृत कर किसानों द्वारा लाए गए गन्ने को वापस भेज रहा है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसान मेहनत-मजदूरी कर किसी प्रकार गन्ने की फसल उगाता है और मिल प्रबंधन अनावश्यक रूप से किसानों को परेशान करते हुए गन्ना वापस कर देता है, जबकि मिल प्रबंधन किसानों से गन्ना उधार खरीदता है, जिसका भुगतान वह एक-डेढ़ साल बाद में करता है। कहा कि गन्ने का अस्वीकृत बीज भी सहकारी चीनी मिल द्वारा ही उपलब्ध कराया गया है। काफी देर तक गहमागहमी के पश्चात चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक तथा किसानों के बीच सहमति बनी कि वर्तमान पेराई सत्र में इस प्रजाति का गन्ना मिल स्वीकार करेगी परंतु भविष्य में किसान इस प्रजाति के गन्ना की बुवाई नहीं करेंगे और ना ही चीनी मिल इस प्रजाति के गन्ने की खरीद करेगी। इस दौरान डॉ. संदीप सिंह, जयदीप सिंह, सुभाष राणा, राव शौकत, देवेंद्र सिंह, विक्रम, जल सिंह, सुरेंद्र सिंह आदि किसान रहे।
रिकवरी नहीं देता 5125 प्रजाति का गन्ना
प्रधान प्रबंधक वीपी पांडेय ने कहा कि इस प्रजाति के गन्ने से रिकवरी नहीं हो रही जिसका असर चीनी उत्पादन पर पड़ने लगा। उत्पादन कम होने से चीनी मिल को नुकसान हो रहा था, इसलिए इस गन्ने की खरीदारी करने से मना किया गया है। फिलहाल तय हुआ है कि चीनी मिल वर्तमान पेराई सत्र में तो इस प्रजाति का गन्ना खरीद लेगी परंतु भविष्य में इस गन्ने की बिल्कुल भी खरीदारी नहीं की जाएगी। सहकारी चीनी मिल के मुख्य गन्ना अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि गन्ने की 5125 (डुप्लीकेट) प्रजाति उत्तर प्रदेश में मान्य नहीं है और ना ही चीनी मिल ने किसी किसान को इस प्रजाति के गन्ने का बीज दिया है किसान स्वयं कहीं से बीज लाए हैं, जिसकी जानकारी चीनी मिल को नहीं है।