यह था मामला
शिकायत दर्ज कराने वाले शख्स ने आयोग को बताया कि दारुल उलूम अपने फतवों में यह कहता है कि बच्चा गोद तो लिया जा सकता है, लेकिन परिपक्व होने के बाद उसका संपत्ति में हिस्सा नहीं होगा, साथ ही किसी भी मामले में वह वारिस नहीं होगा। इस तरह के उक्त शख्स ने बच्चों से संबंधित कई अन्य फतवों का जिक्र कर उनकी सूची आयोग को दी है।
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प्रतिवर्ष जारी होते हैं डेढ़ हजार से अधिक फतवे
दारुल उलूम में स्थापित दारुल इफ्ता में निकाह, हलाल, हराम, तलाक, विरासत आदि से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं। विभाग से जुड़े मुफ्ती शरीयत की रोशनी में इनका जवाब देते हैं। प्रतिवर्ष करीब डेढ़ हजार से अधिक फतवे संस्था से जारी होते हैं। दुनियाभर के मुस्लिम अपनी समस्याओं का हल शरीयत की रोशनी में निकल सकें। इसलिए इन्हें पोर्टल पर भी अपलोड किया जाता है।