उधर, फलस्तीन के यतीम बच्चों का दारुल उलूम में लाए जाने पर कहा कि यह महज कोरी अफवाह है। कोई भी इस अफवाह पर ध्यान न दें। यह केवल दारुल उलूम को बदनाम करने की साजिश है। दरअसल, किसी ने अफवाह उड़ा दी थी कि फलस्तीन के यतीम बच्चों को यहां पर लाया गया है।
यह था मामला
दो नवंबर को नगर के महमूद हाल में रात्रि के समय बागपत के रहने वाले जिया नामक शायर के सम्मान में एक मुशायरे का आयोजन किया गया था। जिसमें कुछ महिला शायर भी बुलाई गईं थी। इस दौरान काफी संख्या में वहां लोग इकट्ठा हुए। जिन्होंने महिला शायर के शेरों पर जमकर शोर मचाया।
किसी ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। इसी को लेकर लखनऊ के प्रसिद्ध आलिम मौलाना सज्जाद नौमानी ने शोर मचाने वालों को मदरसा छात्र बताया और मदरसों की तरबियत पर सवाल खड़े किए थे।
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