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Deepawali 2023 : उजाले का त्योहार, मिट्टी के दीपों की बहार, खूब हो रही बिक्री

Thu, 09 Nov 2023 12:59 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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मिट्टी के दीये - फोटो : amar ujala
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आधुनिक दौर में भले ही प्लास्टिक से बने इलेक्ट्राॅनिक दीपक बाजार में आए हों, लेकिन मिट्टी के दीपक लोगों की पहली पसंद बने हैं। क्योंकि मिट्टी के दीपक जलाने की प्राचीन परंपरा है, जिसे शुभ माना जाता है। जनपद ऐसे कई कुम्हारों के परिवार हैं, जो तीन से चार पीढि़यों से दीपक बनाने के साथ ही मिट्टी के विभिन्न प्रकार का सामान तैयार कर रहे हैं। बीते वर्षों की अपेक्षा मिट्टी के दीपक की मांग बढ़ी है।

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शनिवार और रविवार को दीपों का त्योहार दीपावली धूमधाम से मनाई जाएगी, जिसको लेकर इन दिनों बाजार भी गुलजार हैं। बाजार में प्लास्टिक के फैंसी और इलेक्ट्रॉनिक दीपक भी आए हुए हैं, लेकिन जिले भर में कुम्हार भी लाखों की तादाद में मिट्टी के छोटे बड़े दीपक तैयार कर रहे हैं, जिनकी खूब बिक्री हो रही है।

दुर्गा पुरी कॉलोनी निवासी राजकुमार की तीन पीढि़यां मिट्टी के दीपक, सुराही, करवा, घड़ा सहित अनेक प्रकार का सामान चाक पर तैयार कर रहे हैं। इनके परिवार की महिलाएं भी इस काम से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि इन दिनों मिट्टी के दीपकों की खूब मांग है।

खलासी लाइन निवासी नितिन प्रजापति और उनकी पत्नी संगीता भी चाक पर मिट्टी के दीपक और अन्य सामान तैयार करती हैं। इनकी भी चार पीढि़यां इसी काम से जुड़ी हैं। इनका कहना है कि बीते चार वर्षों में मिट्टी के दीपकों का कारोबार बढ़ा है। यहीं के निवासी दीपक कुमार की तीन पीढि़यां भी इसी कारोबार से जुड़े हैं।

 
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यह दीपकों के दाम
- सामान्य छोटे दीपक बिकते हैं 50 रुपये में 100
- इनसे बड़े प्रति दीपक की कीमत पांच रुपये

- चार मुंह वाले दीपक की कीमत दस रुपये
- इससे बड़े दीपक विशेष आर्डर पर तैयार होते हैं

शुभ है मिट्टी का दीपक जलाना
राधा विहार स्थित सिद्धपीठ वैष्णवी महाकाली मंदिर के अधिष्ठाता और ब्रह्मपुरी कॉलोनी श्री बगलामुखी के अधिष्ठाता रोहित वशिष्ठ का कहना है कि भारतीय संस्कृति में मिट्टी के दीपक जलाना ही शुभ है। दीपावली पर मिट्टी के दीपक प्रज्ज्वलित करने की खास परंपरा है।
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