रामपुर। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हो रही मूसलाधार बारिश से रामपुर में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। रामनगर बैराज से कोसी नदी में 42 हजार पांच सौ क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे नदी के किनारे के गांवों में पानी घुस सकता है। लिहाजा, सिंचाई विभाग की ओर से गांवों में जाकर ग्रामीणों को अलर्ट किया गया। रात में गांवों में जाकर ग्रामीणों से नदी के किनारे न जाने की अपील की गई। वहीं, लालपुर में हाल ही में बने अस्थाई पुल को भी खतरा हो सकता है।
रविवार दोपहर से पहाड़ी इलाकों एवं रामपुर में लगातार बारिश हो रही है। यही वजह है, जो हमेशा सूखी रहने वाली नदियों में भी पानी नजर आने लगा हैं। सोमवार को तो रामनगर बैराज से 42 हजार पांच सौ क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिस वजह से नदी का जलस्तर और बढ़ गया है। हालांकि, नदी में खतरे का निशान 197.83 मीटर है, जबकि पानी का बहाव इससे काफी नीचे है, लेकिन मैदानी और पहाड़ी इलाकों में इसी तरह से बारिश होती रही, तो रामपुर में भी बाढ़ आ सकती है। लिहाजा, जैसे ही सिंचाई विभाग को नदी में पानी छोड़े जाने की सूचना मिली, तो अधिकारी अलर्ट हो गए। आनन फानन में अधिकारियों ने नदी के किनारे बसे गांवों में जाकर ग्रामीणों को जानकारी दी। ऐलान किया गया कि कोई भी ग्रामीण नदी के किनारे न जाए, क्योंकि नदी किनारे के गांवों पानी घुस सकता है। इसके अलावा रामपुर को टांडा से जोड़ने के लिए कोसी नदी पर लालपुर में बने अस्थाई पुल को भी खतरा हो सकता है। पूरी संभावना है कि अस्थाई पुल पानी के बहाव में बह जाए। इससे पहले भी 2010 में रामपुर में बाढ़ ने तबाही मचाई थी। नदी किनारे स्थित सैदनगर क्षेत्र के कई गांव में पानी घुस गया था। इसके अलावा स्वार, टांडा और शाहबाद क्षेत्र के भी कई गांव पानी में डूब गए थे। आलम यह है कि दिल्ली-लखनऊ हाईवे से पानी उतरने लगा था, जिसके कारण उस वक्त करीब आठ दिन तक हाईवे बंद रहा था। पानी इतना ज्यादा था कि गांवों के लोग छतों पर बसेरा करने को मजबूर हो गए थे। ऐसे में इस बार भी बारिश को देखते हुए यह आशंका गहराती जा रही है कि एक बार फिर बाढ़ तबाही मचा सकती है। डेढ़ सौ गांव बाढ़ के मुहाने पर हैं, जहां बड़े पैमाने पानी भर जाता है। रास्तों से लेकर मकानों तक पानी ही पानी नजर आता है।