उत्तरप्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया क्या हिन्दूवादियों के नजदीक आ रहे हैं?
क्या वे भारतीय जनता पार्टी के कुछ बड़े नेताओं के करीब होते जा रहे हैं? क्या वे फिर से भाजपा के करीब आने की कोशिश कर रहे हैं।
यूपी के सियासी गलियारों में यह चर्चा इन दिनों आम हो गई है। वजह कई हैं। लेकिन फिलहाल चर्चा इसलिए है क्योंकि हाल ही में पाकिस्तान से आए शरणार्थी हिन्दुओं की मदद केलिए वे बेहद सक्रिय दिखाई दिए।
राजा ने पिछले महीने भारत में बसने के लिए मदद की गुहार कर रहे इन हिन्दुओं के शिविर में जाकर उनकी आर्थिक मदद की थी। वह उन्हें पूर्ण रूप से भारत में बसने देने के लिए भी मदद करने को तैयार हैं।
राजा भैया बीते 16 अप्रैल को भी इन शरणार्थी शिविरों में गए थे और वहां उन्होंने एक लाख रुपये की आर्थिक मदद भी की थी। इस शिविर में पाकिस्तान से भागकर आए 482 परिवार रह रहे हैं।
शिविर में रहने वाले लोगों का कहना है कि राजा भैया ने तो उन्हें कुंडा में रहने केलिए जमीन देने का भी वायदा किया है।
राजा भैया केइस कदम को हिन्दुओं के प्रति नरमदिली के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि राजा भैया इससे इंकार करते हैं।
वह कहते हैं कि - वह केवल मदद करने में विश्वास करते हैं। जो किया है, उसका प्रचार नहीं करना चाहते हैं।’ वह इसमें किसी भी तरह की राजनीति से भी इंकार करते हैं।
हिन्दुओं की मदद को वह निजी मामला बताते हैं और नजदीकी रिश्तों केबारे में पूछने पर वह कहते हैं - ‘ नो कमेंट’।
राजा भैया को लेकर भाजपा के कई नेताओं की नरमदिली को लेकर भी तरह तरह की वजहें गिनाईं जा रही हैं।
कुंडा कांड में उनका नाम आने के बाद गोरखपुर से भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ उनकेपक्ष में उतर आए थे।
उन्होंने साफ कहा था कि ‘राजा को साजिश के तहत फंसाया गया है।’ राजा भैया के पिता राजा उदय प्रताप सिंह के विश्व हिन्दू परिषद से रिश्ते जग-जाहिर हैं।
कुंडा कांड में राजा भैया का नाम आने के बाद भी वह इलाहाबाद में बीती चार मार्च को विश्व हिन्दू परिषद के कार्यालय केसर भवन में विहिप नेता अशोक सिंघल से मिलने गए थे।
गोरक्षनाथ मंदिर से भी राजा भैया के परिवार के पुराने रिश्ते रहे हैं। इसी वजह से सांसद योगी आदित्यनाथ राजा के पूरे परिवार को हिन्दुत्वादी मानते रहे हैं।
भाजपा सरकार में रहे हैं मंत्री
राजा भैया वर्ष 2003 केबाद मुलायम सिंह यादव और समाजवादी पार्टी से नजदीक आने से पहले भाजपा के करीबी रहे हैं। वह भाजपा के तीन मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में मंत्री भी रहे।
वर्ष 1997 में वह कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री रहने के दौरान कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री रहे, 1999 में राम प्रकाश गुप्ता केकार्यकाल में खेल एवं युवा कल्याण और वर्ष 2000 में राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्वकाल में खाद्य एवं रसद मंत्री रहे हैं।