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पंचायत चुनाव ने चौपट कर दी स्कूलों की पढ़ाई

Tue, 29 Sep 2015 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों की किस्मत संवरने का नाम नहीं ले रही है। लाख कोशिशों के बावजूद इन स्कूलों में पठन-पाठन का वातावरण नहीं बन पा रहा है। तमाम सरकारी लुभावनी योजनाएं औंधे मुंह गिर रही हैं। वर्तमान शैक्षिक सत्र तो पंचायत चुनावों की भेंट चढ़ चुका है। हालात इतने गंभीर हैं कि अनेक स्कूलों में 30 सितंबर से ताले लटकने लगेंगे। पंचायत चुनावों के परिणामों की घोषणा के बाद ही इन स्कूलों की पढ़ाई पटरी पर लौट सकेगी।
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परिषदीय स्कूलों के बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर किसी न किसी कारण से ब्रेक लग ही जाता है। इन स्कूलों के शिक्षकों से पढ़ाई के अतिरिक्त इतने कार्य लिए जाते हैं कि वे बच्चों पर अपेक्षाकृत कम ही ध्यान दे पाते हैं। चालू शैक्षिक सत्र पर तो प्रारंभ से ही पंचायत चुनावों का साया मंडराने लगा था। जून महीने से ही पंचायत चुनावों की मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य प्रारंभ हुआ। गुरुजी की ड्यूटी बीएलओ के रूप में लगा दी गई। जुलाई और अगस्त महीने में गुरुजी मतदाता सूची में ही माथापच्ची करते रहे। लोग स्कूलों में डेरा डालकर मतदाता सूची में मनमाफिक नाम सम्मिलित करने का दबाव बनाते रहे।

गुरुजी गांवों में चुनावी समीकरण ही समझते रह गए। बच्चों को पढ़ाने का मौका ही नहीं मिला। जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्यों के लिए चुनाव की तिथियों का ऐलान हुआ तो गुरुजी चुनावी ड्यूटी और प्रशिक्षण को लेकर परेशान हो गए। जिले में चार चरणों में होने वाले चुनावों के लिए आज से प्रशिक्षण प्रारंभ हो जाएगा। इसी के साथ कई स्कूलों में ताले लटकने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
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जहां एक ही शिक्षक हैं और उन्हें प्रशिक्षण में जाना होगा तो वहां स्वाभाविक रुप से छुट्टी ही रहेगी। दो और तीन शिक्षक भी होंगे तो भी स्कूल बंद हो सकता है क्योंकि सभी शिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम एक दिन ही हो सकता है। गुरुजी जब मतदान कराने जाएंगे तो मतदान के एक दिन पूर्व, मतदान दिवस और उसके एक दिन पश्चात तक कई स्कूलों में ताले लटके रहेंगे। एक शिक्षक की ड्यूटी यदि दो चरणों में लगाई जाएगी तो यही स्थिति दो बार बनेगी। ऐसे में एक सप्ताह की स्कूलों में तालाबंदी तय है। ग्राम प्रधानों और पंचायत सदस्यों के चुनावों में भी ऐसी ही परिस्थितियों की पुनरावृत्ति हो सकती है। मतदान के बाद गुरुजी की ड्यूटी मतगणना में भी लगाई जाती है। ऐसे में मतगणना दिवस पर भी कुछ स्कूलों में ताले लटक सकते हैं। कुल मिलाकर पंचायत चुनावों के कारण परिषदीय स्कूलों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है।
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