जनसंख्या को काबू करने के लिए भले ही सरकार करोड़ों रुपये खर्चे कर रही हो, लेकिन कुछ योजनाएं हीलाहवाली के चलते अंधकार में गोते लगा रही हैं। जिले में पुरुष नसबंदी योजना का कुछ ऐसा ही हाल है। इस वर्ष जिले में एक भी पुरुष नसबंदी नहीं हो सकी। यह हाल तब है जब वित्तीय वर्ष समाप्त होने में मात्र तीन माह शेष बचे हैं।
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यह है पुुरुष नसबंदी का हॉल
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में नसबंदी कराने वाले पुरुष को 1100 रुपये और महिलाआें को 600 रुपये प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। अब जिले में पुरुष नसबंदी कार्यक्रम पर गौर करें तो पिछले दो सालों से पुरुष नसबंदी का ग्राफ निरंतर गिरता जा रहा है। वर्ष 2012 में 18 और वर्ष 2013 में मात्र सात पुरुषों की नसबंदी की गई। इस वर्ष के आंकड़े तो और भी चौंकाने वाले हैं। इस वर्ष 35 पुरुष नसबंदी लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक एक भी नसबंदी नहीं की गई।
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चार साल ने नहीं लगे कैंप
वर्ष 2009 में ब्लाक लेबिल पर पुरुष नसबंदी कैंपों का आयोजन किया गया था। तब से अब तक जिले में पुरुष नसबंदी कैंपों का आयोजन बंद पड़ा है। धनराशि होने के बाद भी इसका संचालन नहीं हो रहा है। इसके पीछे कारण जो भी रहे हो, लेकिन विभागीय अधिकारी इसमें कतई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
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जनवरी से लगाए जाएंगे कैंप
जिले में सर्जनों की कमी है। हाल ही में एक और सर्जन ने वीआरएस ले लिया है। एक संस्था से वार्ता हुई है। जनवरी से नसबंदी कैंपों का आयोजन कर लक्ष्य पूरा किया जाएगा।
सर्वेश वर्मा, डीपीएम, नेशनल हेल्थ मिशन
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यह है हाल
वर्ष इतनी हुई नसबंदी
2012 18
2013 07
2014 00 (अब तक)