सहायक निदेशक रेशम कार्यालय। संवाद
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पीलीभीत। ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए रेशम विकास विभाग की योजनाएं सिर्फ अभिलेखों तक ही सीमित है। धरातल की बात करें तो जनपद की किसी भी ग्राम पंचायत में कीटपालन गृह नहीं है। जबकि अधिकारी 15 कीटपालन गृहों में प्लांटेशन शुरू करने के दावे कर रहे हैं।
रेशम कीट पालन एक कृषि आधारित उद्योग है। इसके तहत कच्चे रेशम के लिए रेशम के कीड़ों का पालन किया जाता है। रेशम उत्पादन करने के लिए बड़ी मात्रा में रेशम उत्पादक कीड़ों का पालन करना होता है। यह व्यवसाय कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए बेहतर है। मगर जनपद में मुख्यमंत्री की प्राथमिकता से जुड़ी महत्वाकांक्षी परियोजना रेशम उत्पादन को विभाग ठीक तरीके से संचालित नहीं कर सका है। इसके लिए कीटपालन गृह को संचालित करने के लिए ग्रामीणों को रेशम विभाग की ओर से धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। इससे ग्रामीण आसानी से प्लांटेशन करने के बाद कीट पालन कर सके। मगर रेशम विकास विभाग की ग्रामीणों को रोजगार देने के साथ रेशम उत्पादन परियोजना सिर्फ अभिलेखों तक ही सीमित है। इस योजना के तहत 2020 में 17 कीटपालन गृह के लिए योजना शुरू की गई थी। मगर कोरोना संक्रमण के चलते इस योजना को गति नहीं मिल पाई। चालू वित्तीय वर्ष में 15 कीटपालन गृह के बनाने के लिए योजना शुरू की गई। इसके बाद भी जनपद की किसी भी ग्राम पंचायत में योजना के तहत कीटपालन गृह शुरू नहीं किए जा सके। इससे शासन की इस परियोजना से ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि रेशम विभाग की ओर से लगातार अभिलेखों में प्लांटेशन से लेकर कीटपालन गृह तक चल रहे है। रेशम विभाग के अधिकारी ने बताया कि गत वर्ष और चालू वर्ष दोनों की योजना को शुरू कर दिया गया है, मगर जब जानकारी की गई, तो वह सिर्फ एक ही प्लांटेशन वाला गांव बता सके। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि योजना किसी तेजी जनपद में चल रहीं है।
ग्रामीणों को नहीं है योजना की जानकारी
पिछले डेढ़ दशक से रेशम उत्पादन योजना चल रही है। केंद्र द्वारा बड़े पैमाने पर रेशम उत्पादन किया जाता है। बड़ी संख्या में किसान परियोजना से जोड़े जाते हैं, इसकी जानकारी क्षेत्र के अधिकतर लोगों को नहीं है। जागरूकता सिर्फ कागजों तक ही सीमित है।
जनपद में इस बार 15 किसानों के यहां प्लांटेशन कराया जा रहा है ताकि कीटपालन गृह खोले जा सके। इसके अलावा गत वर्ष के 17 प्लांटेशन हो रहे हैं। प्लांटेशन तैयार होने के बाद कीटपालन गृह शुरू कराए जाएंगे। हालांकि मौजूद समय में जनपद में कोई भी कीटपालन गृह संचालित नहीं हो रहा है। प्लांटेशन तैयार होने के बाद कीटपालन गृह के लिए किसानों के खाते में पैसा भेज दिया जाएगा। - मिथलेश कुमार सिंह, सहायक निदेशक रेशम