बताया गया कि पति की मौत के बाद वह अपने पारिवारिक देवर जॉनी के साथ मेरठ के पल्लवपुरम में रोजी रोटी कमाने के लिए चारों बच्चों को लेकर चली गई थी। बबीता ने दोबारा नई जिंदगी शुरू की। गांव में मकान पर ताला लग गया था। रविवार को होली पर परिवार को घर आना था, लेकिन शनिवार को घर में हुए हादसे में बबीता के चारों बच्चों की मौत हो गई। जबकि बबीता व जॉनी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका उपचार चल रहा है।
यह हुआ हादसा
पल्लवपुरम की जनता कॉलोनी में किराए के घर में जॉनी व बबीता रसोई में थे और बच्चे कमरे में थे। बिस्तर पर रखे बिजली के एक्सटेंशन बोर्ड में मोबाइल का चार्जर लगाते समय शार्ट सर्किट से कमरे में आग लग गई थी और इस आग में चारों बच्चों की जलने से मौत हो गई थी। बचाव करते समय यह दोनों भी बुरी तरह से झुलस गए थे।
गांव में गम, परिवार के बह रहे आंसू
इस हादसे की जानकारी मिलने के बाद सिखेड़ा गांव में मिंटू के पारिवारिक लोगों में शोक है। गांव में रह रहे पारिवारिक महिला कमलेश (चाची), किरण (चाचा), टिंकू (दामाद) ने घटना पर दुख जताया। उन्होंने बताया कि रविवार को परिवार को गांवा में आना था।
ताऊ व परिजन पंजाब में कर रहे मजदूरी
बबीता की ससुर रतन सिंह और सास की पहले ही मौत हो गई थी। पहले पति मिंटू का ताऊ निरब सिंह अपने अविवाहित दो बेटों सचिन व रोबिन तथा बेटी काजल के साथ पंजाब में भठ्ठे पर ईंट पथाई का काम करता है। एक बेटा मनोज परिवार सहित गांव में रह कर मजदूरी करता है तो दूसरा बेटा बैंगलौर में नौकरी करता है। मिंटू अपने पिता का इकलौता बेटा था।