तीन साल पहले उड़ती थी धूल, अब लहलहा रहे पेड़
मुजफ्फरनगर। शहर स्थित रामलीला टिल्ला सामूहिक प्रयास, सहयोग और समर्पण की जीती-जागती मिसाल बन गया है। महज तीन साल के अल्प समय में ही स्थानीय लोगों ने अपने प्रयासों से उजड़े स्थल को हरे-भरे पार्क और लहराते पेड़ों के घने जंगल में तब्दील कर दिया है। जहां पहले लोग जाने से कतराते थे, वहां अब सुबह-शाम लोग जॉगिंग करते, व्यायाम करते और हंसते-खिलखिलाते मिलते हैं। इस स्थल को लेकर लोगों का नजरिया भी पूरी तरह बदल गया है।
शहर का रामलीला टिल्ला पर कई दशकों से शहर की सबसे पुरानी रामलीला का आयोजन होता है। सनातन धर्म सभा इस बेशकीमती भूमि पर अपना दावा तो करती है, लेकिन कभी यहां के रख-रखाव के बारे में नहीं सोचा गया। नतीजतन, दशकों पहले यहां मौजूद इमली, बरगद समेत कई अन्य पेड़ एक-एक कर काट दिए जाते रहे और रामलीला टिल्ला एक उजाड़ स्थल बनकर रह गया। लंबे समय तक यहां असामाजिक तत्वों का डेरा रहा, जिससे लोग यहां जाने से कतराने लगे। तीन साल पूर्व स्थानीय लोगों ने रामलीला टिल्ले की दशा सुधारने का बीड़ा उठाया और अधिवक्ता नवाब सिंह पंवार के नेतृत्व में कुछ लोग इकट्ठा हुए। इनमें स्थानीय सभासद पति नरेश खटीक, सतीश वर्मा, रामचंद्र सैनी, वेदपाल सिंह, राजबीर सिंह समेत अन्य लोग शामिल थे।
इन लोगों ने पहले राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल से मिलकर रामलीला टिल्ला की बाउंड्री वॉल कराने की मांग की। जिस पर राज्यमंत्री ने यहां की बाउंड्री वॉल बनवाते हुए उस पर लोहे की बेरिकेडिंग भी करा दी। इसके बाद स्थानीय लोगों ने सभी लोगों को एकजुट करते हुए यहां एक-एक कर पेड़ लगाने शुरू किए, जिनकी निगरानी के लिए अपने स्तर से ही एक चौकीदार रखा गया। कुछ माह बाद इन पेड़ों के जड़ पकड़ने के बाद क्षेत्र के लोगों को यहां पेड़ लगाने के लिए आमंत्रित किया गया, जिसके बाद लोग विशेषकर युवा यहां पेड़ लगाने के लिए आने लगे। देखते ही देखते महज तीन साल की अल्प अवधि में ही अब इस रामलीला टिल्ला की शक्लो-सूरत पूरी तरह से बदल चुकी है। अब लोग यहां न केवल सुबह-शाम घूमने आते हैं, बल्कि युवाओं व बच्चे भी बड़ी संख्या में यहां खेलने आते हैं।
राज्यमंत्री ने लगवाए झूले व रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
मुजफ्फरनगर। रामलीला टिल्ला की शक्लो-सूरत बदलने में राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल का भी बहुत सहयोग रहा है। उन्होंने न केवल यहां की बाउंड्री वॉल बनवाकर सुंदरीकरण की शुरूआत की, बल्कि स्थानीय लोगों के सामने आने के बाद यहां बच्चों के लिए झूले और बारिश का पानी संचित करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी स्थापित कराया।