प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-9 के पीठासीन अधिकारी कनिष्क कुमार सिंह ने की। अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। दोषी अजीत को आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। दूसरे आरोपी के नाबालिग होने पर उसकी पत्रावली अलग कर दी गई थी, जिसे पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है।
दंगे के दौरान तंत्र-मंत्र बताई थी वजह
अंकुर की हत्या दंगे के दौरान हुई थी। पहले तंत्र-मंत्र वजह बताई गई, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। इसके बाद यह भी शोर मचा था कि दंगे में हत्या हुई है, लेकिन पुलिस जांच में दंगे के दौरान हत्या का मामला साबित नहीं हो सका था।
डीजीसी फौजदारी राजीव शर्मा और एडीजीसी फौजदारी ललित भारद्वाज ने बताया कि शहर की सिविल लाइन थाना क्षेत्र की जाट कॉलोनी निवासी 18 वर्षीय अक्षय 30 जनवरी 2016 को घर से जिम जाने के लिए निकला था। परिजनों को रात करीब नौ बजे सूचना मिली कि मीनाक्षी चौक के निकट अजमत मार्केट के सामने अक्षय की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। परिजन मौके पर पहुंचे। उसके पिता सतीश कुमार ने अंबा विहार निवासी शोएब और लद्दावाला निवासी दानियल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया। प्रकरण की सुनवाई जिला जज की कोर्ट में हुई।
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दोनों आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ। धारा 302 में आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड नहीं देने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पुलिस जांच में सामने आया था कि अक्षय और शोएब व दानियल के बीच पिस्टल को लेकर विवाद चला आ रहा था। उसी पिस्टल से गोली मारकर अक्षय की हत्या कर दी गई थी।