मुरादाबाद। सेटेलाइट की निगरानी में जिले में पराली जलाने के नौ मामले सामने आए हैं। इनमें से सात मामलों की पुष्टि हुई है। कृषि विभाग की टीम ने किसानों को इसके लिए जागरूक किया है। पिछले साल 19 मामले प्रकाश में आए थे।
10 नवंबर को बिलारी क्षेत्र के खावरी अव्वल गांव में गन्ने के फसल अवशेष में आग लगाने का मामला प्रकाश में आया है। इसी दिन किशनपुर में भी फसल अवशेष जलाने की सूचना सेटेलाइट से मिली, लेकिन मौके पर जांच को पहुंची टीम को इसकी पुष्टि नहीं हुई। 11 नवंबर को ठाकुरद्वारा क्षत्र के अब्दुल्लापुर लेदा में गन्ने के फसल अवशेष जलाने का मामला आया था। अक्तूबर के महीने में भी कई मामले आए थे। इनमें ठाकुरद्वारा के फरीदनगर में धान की अवशेष फसल में आग लगाने का मामला आया था। इसी दिन अबदुल्लापुर लेदा में भी धान की फसल अवशेष जलाने का मामला प्रकाश में आया था।
इसके अलावा कुंदरकी क्षेत्र के गुरैर गांव में धन की फसल अवशेष जलाने की घटना हुई थी। इसके अलावा भोजपुर धर्मपुर में भी एक स्थान से पर बैटरी जलाकर शीशा निकालने वाली एक फैक्टरी का धुआं भी सेटेलाइट ने पकड़ा गया था। भगतपुर टांडा क्षेत्र के बुरहनपुर मुस्तक में भी धुआं निकलने की सूचना सेटेलाइट से मिली थी, लेकिन लेेखपाल और कृषि विभाग की टीम की जांच में ये घटना इस गांव के नजदीक उत्तराखंड में पकड़ने वाले गांव की मिली। कृषि उपनिदेशक सीएल यादव ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभाग किसानों को जागरूक कर रहा है। उनसे फसल अवशेष ना जलाने की अपील की जा रही है। इस साल नौ सूचनाएं सेटेलाइट से मिली थी, जिनमें से दो की पुष्टि नहीं हुई। बाकी में किसानों से वार्ता कर फसल अवशेष नहीं जलाने को कहा गया है। हालांकि इस साल इस तरह की घटनाएं कम है। बीते साल 19 मामले आए थे।