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मिर्जापुर नाव हादसा: मासूम सत्यम का शव देख पिता हुए बेसुध. पांच की तलाश अभी जारी, नाविक पर मुकदमा दर्ज

Fri, 10 Sep 2021 12:19 AM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर

सार

विंध्याचल कोतवाली क्षेत्र के अखाड़ा घाट पर बुधवार की दोपहर गंगा पार स्नान कर लौटने के दौरान नाव पलट गई थी। जिसमें 14 लोग सवार थे। नाविक समेत आठ लोग बचा लिए गए, लेकिन परिवार के छह लोग लापता हो गए थे। 
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मिर्जापुर नाव हादसा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विंध्याचल के अखाड़ा घाट पर नाव दुर्घटना के दूसरे बृहस्पतिवार की तड़के लापता लोगों की तलाश शुरू हुई। एनडीआरफ, पीएसी फ्लड टीम के साथ ही स्थानीय गोताखोर ने गंगा नदी में सुबह ही सर्च ऑपरेशन चलाया। दोपहर बाद फतहां के पास सत्यम (5) लाश मिली। शाम ढलने के साथ ही परिजनों व सर्च टीम की उम्मीद भी धुंधलाती नजर आई। 

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लापता छह लोगों में से मासूम सत्यम (5) पुत्र विकास की लाश दूसरे बृहस्पतिवार को मिली। पिता विकास पर बच्चे का शव देख मानो बुत बन गए। बाकी सदस्यों की तलाश देर शाम तक जारी रही। 
दूसरे दिन भी घाट का माहौल द्रवित करने वाला रहा। सत्यम का शव मिलने के बाद विकास के साथ ही दीपक और राजेश के आंखों से अश्रु की धारा नहीं धमी।

विकास की पत्नी गुड़िया, बेटा सत्यम (5) और शौर्य (2.5) गंगा में समाहित हो चुके हैं। विकास सिर्फ गंगा मैया से गुहार लगाता रहा कि मैय्या मेरे बबुआ को वापस कर दो। साथ में आये राजेश की पत्नी खुशबू और दीपक की पत्नी अनीषा और दो माह की बेटी (जिसका नामकरण नही हुआ था) भी काल के गाल में समा गईं। हादसे में बचीं अल्का और रीतिका भी अपनी मां को रो-रो कर बुला रही थी कि मां आ जाओ ना। 
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ऐसे हुआ हादसा
विंध्याचल कोतवाली क्षेत्र के अखाड़ा घाट पर बुधवार की दोपहर गंगा पार स्नान कर लौटने के दौरान झारखंड के दर्शनार्थियों से भरी नाव पलट गई। इसमें सवार नाविक समेत 14 लोग गंगा नदी में गिर गए। नाव डूबता देख गंगा किनारे मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी और गोताखोरों की मदद से झारखंड के पांच श्रद्धालुओं, नाविक, वाहन चालक और एक फोटोग्राफर को बचा लिया तो वहीं छह लोग नदी में लापता हो गए।

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नाविक ने नहीं मानी बात
ये हादसा नहीं होता अगर नाविक दर्शनार्थियों की बात मान लेता। बारिश होने के दौरान परिजनों के मना करने के बाद भी नाविक का अति उत्साह हादसे वजहों में से एक रहा। हादसे में बचे राजेश, विकास और उमेश ने बताया कि नाविक को तैरना भी नहीं आता था। यही कारण ही कि वह दूसरों को बचाने के बजाय खुद ही बाहर आने के लिए हाथपांव मारने लगा। गंगा में नावों के संचालन पर रोक है। इसके बावजूद नावें चल रही हैं। न तो पुलिस को परवाह है और न जिला प्रशासन को।

लापता लोगों की खोजबीन के लिए तलाशी अभियान जारी। - फोटो : अमर उजाला
झारखंड का परिवार पहुंचा था मां विंध्यवासिनी के दर्शन करने
झारखंड के रांची और जमशेदपुर से विकास अपने साले राजेश और दीपक अपने जीजा राजेश के साथ दर्शन करने के लिए विंध्याचल आए थे। साथ में तीनों की पत्नियां व बच्चे भी थे। एक परिवार के 11 सदस्य कार से मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन करने के लिए बुधवार को विंध्याचल पहुंचे। दर्शन पूजन करने से पहले सभी गंगा घाटपर स्नान करने के लिए गए।

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परिवार के सभी लोग अखाड़ा घाट पर पहुंचे तो वहां पर कीचड़ था, इसलिए गंगा स्नान करने के लिए सभी नाव पर सवार होकर गंगा पार गए। स्नान करने के बाद सभी नाव से इस पर आ रहे थे कि तभी बारिश के साथ तेज हवा चलने लगी। इस बीच नाव गंगा में पलट गई। जिसमें नाविक समेत सभी 14 लोग गंगा नदी में गिर गए।

गंगा किनारे मौजूद स्थानीय लोगों व गोताखोरों ने गंगा में कूदकर आठ लोगों को बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। उधर छह लोग गहरे जल में लापता हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस जाल डालकर आसपास के अन्य गोताखोरों को बुलाकर गंगा में डूबे छह लोगों की तलाश में जुटी रही।

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लापता लोग
गुड़िया(28) पत्नी विकास, खुशबू(30) पत्नी राजेश, अनीशा(26) पत्नी दीपक,  शौर्य(3) पुत्र विकास, दीपक का दो माह का पुत्र लापता है। इनमें से सत्यम और एक महिला का शव मिल गया है।

बचाए लोग-
राजेश कुमार तिवारी(35) पुत्र भुवनेश्वर तिवारी घुरवा रांची झारखंड, विकास ओझा(28) पुत्र अमरनाथ ओझा जमशेदपुर, दीपक मिश्रा(27) पुत्र उमेश मिश्रा जमशेदपुर, चालक सुदीप कुमार(38) पुत्र स्व. रमाशंकर बक्सर, अलका(9) पुत्री राजेश, रितिका(7) पुत्री राजेश , नाविक गौतम निषाद(16) पुत्र गुरु निषाद, फोटोग्राफर प्रदीप(20) पुत्र कैलास निषाद।
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